साइंटिस्ट्स ने पुरानी चट्टानों के अंदर बहुत बारीक सुरंगें खोजी
विज्ञान { गहरी खोज }:नामीबिया, ओमान और सऊदी अरब के सूखे इलाकों में खोज कर रहे साइंटिस्ट्स ने पुरानी चट्टानों के अंदर बहुत बारीक सुरंगें खोजी हैं। ये सुरंगें फॉसिल जैसी दिखती हैं। ये बिल्कुल सीधी भी हैं और बराबर दूरी पर बनी हैं। बाहर से ये चट्टानें आम लगती हैं, लेकिन जब इन्हें काटा और पॉलिश किया जाता है, तो ये बारीक सुरंगें साफ दिखने लगती हैं। ये सुरंगें एक मिलीमीटर से भी पतली होती हैं, लेकिन कई सेंटीमीटर गहरी हो सकती हैं।साइंटिस्ट्स को कई निशान मिले एक जर्मन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सीस पास्चियर और उनकी टीम ने लाखों साल पुराने रेगिस्तानी पत्थरों और मार्बल की जांच की। उन्होंने ऐसे इलाके चुने जहां सूखे मौसम की वजह से चट्टानों में दरारें और सुरंगें साफ दिख रही थीं। जब साइंटिस्ट्स ने खास मशीनों से इन सुरंगों की जांच की, तो उन्हें कई हैरान करने वाली बातें पता चलीं। मशीन स्टडी से क्या पता चला? जब साइंटिस्ट्स ने मशीनों से इनकी जांच की, तो उन्हें कई हैरान करने वाली बातें पता चलीं। इन सुरंगों के अंदर भरा मटीरियल बाहर की चट्टान से बिल्कुल अलग था। इन सुरंगों के अंदर कार्बन, फास्फोरस और सल्फर जैसे पदार्थ मिले। ऐसे पदार्थ तभी मिलते हैं जब वहां कोई जीवित जीव या उसके शरीर का कोई हिस्सा मौजूद हो। सुरंगों में पुराने जीव सड़ रहे थे। सुरंगों के आस-पास की चट्टानों का रंग बदल गया था। अंदर मिनरल की परतें जम गई थीं, जो किसी जीव के छोड़े गए कचरे जैसी लग रही थीं। जांच से पता चला कि सुरंगों के अंदर कार्बन और ऑक्सीजन का बैलेंस बिगड़ गया था। इससे पता चलता है कि अंदर कोई जीवित जीव मौजूद था।क्या सुरंगों में कुछ छिपा है? सुरंगों की जांच करने के बाद, वैज्ञानिकों को कुछ नया पता चला। उन्हें कोई पौधे का बचा हुआ हिस्सा या फंगस जैसी कोई चीज़ नहीं मिली। क्योंकि ये चट्टानें बहुत पुरानी हैं, इसलिए इनके अंदर किसी भी जीवित जीव का DNA या बॉडी सेल्स नहीं मिले। सूरज की रोशनी भी इन सुरंगों तक नहीं पहुंचती, इसलिए वैज्ञानिकों का मानना है कि ये सुरंगें शायद माइक्रोऑर्गेनिज्म ने बनाई होंगी जो अंधेरे में चट्टानों के अंदर जिंदा रह सकते हैं। ये खोजें कहां हुईं? यह खोज नामीबिया में शुरू हुई, जिसके बाद वैज्ञानिकों ने ओमान और सऊदी अरब की भी यात्रा की। इन तीनों देशों की चट्टानों और मार्बल में इसी तरह के सुरंग नेटवर्क मिले हैं। फिलहाल, वैज्ञानिकों ने इस रहस्यमयी जीव को कोई नाम नहीं दिया है। उनका कहना है कि यह पक्का करने के लिए और रिसर्च की ज़रूरत है कि इसे किसी जीवित जीव ने बनाया था।
