शराबबंदी का वादा तो भूपेश बघेल ने किया था
सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }: राजनीति में सच और झूठ अपनी सुविधा के अनुसार कहा जाता है।राजनीतिक दलों को झूठ कहने में राजनीतिक फायदा होता हो तो वह राजनीतिक झूठ कहने में कोई संकोच नहीं करते हैं।सच कहने से राजनीतिक नुकसान होता है तो वह सच नहीं कहते हैं।छत्तीसगढ़ में सत्ता में भाजपा है और विपक्ष में कांग्रेस है तो वह भाजपा को याद दिलाती है कि वह तो शराबबंदी की बात किया करती थी आज सत्ता में है तो वह शराबबंदी करती क्यों नही है।शराब से कमाई क्यों कर रही हैं, नई शराब दुकाने क्यों खोलने की बात कर रही है।प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि शराबबंदी की बात करने वाली भाजपा आज शराब खपत बढ़ाने में लगी है। इसके लिए शराब नीति बदलती है, इसके लिए अंग्रेजी शराब दुकान में देशी व देशी शराब दुकानों में अंग्रेजी शराब बेचने का निर्णय किया जा रहा है। पिछले साल ६७ शराब दुकान खोली गईं थी, इस साल फिर ३५ दुकान खोली जानेे वाली हैं।
ऐसा होता रहता है जो विपक्ष में होता है वह सत्तारूढ़ दल को याद दिलाता रहता है कि कभी उसने क्या वादा किया था। सरकार वह वादा पूरा नहीं करती है तो उसे बार बार याद दिलाया जाता है कि आपने चुनाव में महिलाओं से वादा किया था कि कांग्रेस की सरकार आएगी तो राज्य में पूर्ण शराबबंदी की जाएगी।सरकार बनने के बाद वह अपने वादे से मुकर गए और कहने लगे कि साल २०१८ में महिलाओं का दवाब था कि प्रदेश में शराबबंदी हो।हम उनकी सभा में थे हमने भी घोषणा कर दी। इसके अलावा भेंट मुलाकात कार्यक्रम में भी शराबबंदी की मांग होती रही।यह बातें सीएम भूपेश बघेल ने राजधानी के रायपुर के प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विवि शांति सरोवर में नशामुक्ति अभियान की शुरुआत करते कही थी। उन्होंने यह भी कहा था कि सीएम होने के नाते वह आज ही शराब दुकान बंद करा सकते हैं लेकिन क्या यह समस्या का समाधान है।यानी वह भूपेश बघेल जो महिलाओं का वोट लेने के लिए शराबबंदी का वादा करते हैं, सरकार बनने के बाद लगता है कि यह तो समस्या का समाधान नहीं है।
इसके बाद सीएम भूपेश बघेल ने अपने आपको नशे के खिलाफ बताते हुए लोगों का ध्यान शराबबंदी से हटाने के लिए यह कहना शुरू किया कि शराब से ज्यादा खतरनाक तो सूखा नशा है।शराब तो नशे का ही हिस्सा है।अगर सभी नशे के खिलाफ अभियान शुरू किया जाएगा तो माहौल बनेगा।इससे शराबबंदी भी हो सकती है और नशामुक्ति भी हो सकती है।नशामुक्ति में तो शराब,गांजा,सिगरेट,तंबाकू सब आते हैं।इसलिए सीएम बघेल ने राज्य शराबबंदी के वादे से लोगों का ध्यान हटाने के लिए नशामुक्ति का अभियान चलाने को कहा था। एक तरफ उनके राज में नशामुक्ति अभियान चलाने की बातें होती रही और दूसरी तरफ हजारों करोड़ का शराब घोटाला होता रहा यानी एक तरफ लोगों को नशामुक्ति की बातें की जा रही थी और दूसरी तरफ हजारों करोड़ रुपए की अवैध शराब बिक्री भी की जाती रही और उसी कांग्रेस पार्टी के लोग आज कह रहे हैं कि भाजपा शराब की खपत बढ़ा रही है। शराब से ज्यादा से ज्यादा कमाई कर रही है।
जहां तक शराब से कमाई की बात है तो ऐसी कोई सरकार आज तक किसी राजनीतिक दल की नहीं हुई है जिसने राज्य की शराब से होने वाली कमाई कम करने की कोशिश की है। कांग्रेस २०१८ से २०२३ तक सत्ता में रही।क्या उसने शराब से होने वाली कमाई कम करने का कोई प्रयास किया। उसने ऐसा कोई प्रयास नहीं किया बल्कि उसने वादा तो शराबबंदी का किया लेकिन शराब से कमाई तो उसने भी बढा़ने की पूरी कोशिश की। आंकड़े इस बात का सबूत हैं कि कांग्रेस के समय भी शराब से होने वाली आय बढ़ी थी।२०-२१ में शराब से राजस्व ४६३९ करोड़ ताे २२-२३ में बढ़कर ६७८३ करोड़ रुपए हो गया था। माना जा सकता है कि हर सरकार की कोशिश रहती है कि शराब से कमाई हर साल एक दो हजार करोड़ बढे ताकि सरकार को जो खर्च बढ़ता है,उसकी भरपाई की जा सके। जो सब सरकारें करती है, वही साय सरकार भी कर रही है। वह भी अपने खर्च के लिए शराब से कमाई कर रही है। इसलिए इसे तो गलत नहीं कहा जा सकता।
गलत को तब होता जब कोई राजनीतिक दल एक तरफ चुनाव घोषणापत्र में वादा करता है उनकी सरकार बनेगी तो वह शराबबंदी करेंगे और सरकार बनने के बाद वह शराबबंदी की जगह शराब से ज्यादा कमाई भी करता है और शराब घोटाला भी होने देता है। यानी वैध रूप से तो वह शराब की खपत बढ़ाता ही है, अवैध रूप से भी शराब की खपत को बढ़ाता है ताकि उसे वैध के साथ अवैध कमाई भी होती रहे। वैध कमाई से सरकार का खर्च चलता रहे और अवैध कमाई से पार्टी का काम चलता रहे। साय सरकार के समय शराब से वैध कमाई हो रही है तो यह कोई अपराध नहीं है,बुरी बात नहीं है क्योंकि सभी सरकारे शराब से वैध कमाई करती है और उसका उपयोग जनता के भले के लिए किया जाता है। साय सरकार ने कभी शराबबंदी का वादा नहीं किया यह जनता जानती है इसलिए कोई कितना भी कहे कि शराबबंदी की बात करनेवाली भाजपा शराबबंदी नहीं कर रही है तो कोई विश्वास नहीं करने वाला है।
