पांच माह से स्कूल न जाने वाले दो शिक्षक निलंबित, बीईओ काे नाेटिस

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  • बीएसए अनिल कुमार की जांच में खुलासा, रजिस्टर जब्त करते हुए मांगा स्पष्टीकरण

प्रयागराज{ गहरी खोज }: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार ने क्षेत्रीय लोगों और अभिभावकों की शिकायत पर कम्पोजिट विद्यालय राजापुर मांडा का औचक निरीक्षण किया। यहां बच्चों की उपस्थिति 70 प्रतिशत मिली, लेकिन शैक्षिक स्तर व शिक्षकों की कार्यप्रणाली असंतोषजनक पाई गई। सहायक अध्यापक कौशल सिंह एक अक्टूबर से बिना सूचना के गायब मिले। पूर्व में भी उनके अनियमित विद्यालय आने की शिकायतें पाई गईं। लेकिन उनका वेतन रजिया फरहाना नियमित रूप से निकलवाती रहीं।
इस प्रकरण में दोनों शिक्षकों को निलंबित करते हुए हस्ताक्षर रजिस्टर जब्त कर लिया है। बीएसए ने दोनों शिक्षकों से 15 दिन के भीतर इस सम्बंध में लिखित जवाब मांगा गया है, जिससे कि इनके खिलाफ सख्त कारवाई हो सके। इस मामले में बीईओ (खंड शिक्षा अधिकारी) मांडा को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
बीएस अनिल कुमार ने सोमवार को बताया कि 14 फरवरी को उन्होंने विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। एक प्रधानाध्यापक, चार सहायक अध्यापक, दो अनुदेशक और एक शिक्षामित्र कार्यरत हैं। 337 विद्यार्थियों का नामांकन स्कूल में है। निरीक्षण के समय प्रधानाध्यापिका रजिया फरहाना बीआरसी मांडा में प्रशिक्षण के लिए गई थीं। दोनों अनुदेशक एक घंटे देर से विद्यालय पहुंचे। शेष अन्य शिक्षक उपस्थित मिले। हर्ष प्रताप सिंह के सम्बंध में कक्षा सात और आठ के छात्र, छात्राओं से बात करने पर पता चला कि वह बीच-बीच में अनुपस्थित रहते हैं। महिला अनुदेशक समय से विद्यालय में उपस्थित होकर शैक्षिक कार्य करती हैं लेकिन निरीक्षण के दिन देर से आईं। हालांकि दोनों अनुदेशकों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। बीएसए ने बताया कि सहायक अध्यापक कौशल सिंह के बारे में ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिकायत की थी कि वह स्कूल नहीं आते। विद्यालय पहुंचने पर पता चला कि वह एक अक्टूबर 2025 से विद्यालय में बिना सूचना के अनुपस्थित चल रहे हैं। छात्र, छात्राओं से बातचीत में यह नहीं पता चला कि वह क्या पढ़ाते हैं। इससे साफ होता है कि वह अनुपस्थित रहते थे, जबकि प्रधानाध्यापिका और खंड शिक्षा अधिकारी की सांठ-गांठ से उनका वेतन निकलता आ रहा है। यह कृत्य बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है। उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली-1956 के विरुद्ध है।

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