सरकार बात माने तो परेशानी न माने तो परेशानी

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सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }:
हर पार्टी में ननकीराम कंवर जैसे वरिष्ठ नेता होते हैं और अपनी ही पार्टी के लिए आए दिन परेशानी पैदा करते रहते हैं।वह जो कुछ कहते और करते हैं,उससे तो सबको ऐसा लगता है कि वह कुछ भी गलत नहीं कर रहे हैं।वह जो कर रहे हैं तो पार्टी के हर नेता का काम है।यह काम तो हर नेता को करना चाहिए। सीएम भी तो चाहते हैं कि भ्रष्टाचार को राज्य में समाप्त करना है, उनके खिलाफ शिकायत मिलने पर कार्रवाई करना है। यही तो ननकीराम कंवर भी चाहते हैं। वह भी चाहते हैं कि भाजपा का शासन है तो भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तो होनी चाहिए।वह किसी अधिकारी का नाम ले रहे हैं और चाहते हैं कि सरकार उसके खिलाफ कार्रवाई करे तो सरकार को उस अधिकारी के खिलाफ जांच करनी चाहिए और कार्रवाई करनी चाहिए।
इस बार ननकीराम कंवर ने पीडब्लूडी के मुख्य अभियंता विजय कुमार भतपहली पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया है।उऩको पद से हटाने की मांग की है।उनके खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की है।वह पुराने भाजपा नेता है वह जानते हैं कि सरकार पर कैसे दबाव बनाया जा सकता है, कैसे अपनी बात मनवाई जा सकती है, इसलिए उन्होंने विजय कुमार भतपहरी के बारे में पीएम नरेंद्र मोदी,मुख्य सचिव विकासशील व पीडब्लू सचिव कमलजीत सिंह को पत्र लिखकर बताया है कि विजय भतपहरी ने अपने कार्यकाल के दौरान नियमविरुध्द अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया,भ्रष्टाचार व कमीशनखोरी कर सरकार का छबि धूमिल की,सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया।२०११ व २०१५ में मामला भी दर्ज किया गया था। भतपहरी ने अपनी पहुंच व पैसे के दम पर इन जांच को दबाए रखा है।
कंवर चाहते हैं कि भतपहरी के खिलाफ मामला दर्ज है तो जांच भी होनी चाहिए और कार्रवाई भी होनी चाहिए।ननकीराम कंवर ने यह दूसरा मामला उठाया है। इससे पहले उन्होंने कोरबा कलेक्टर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर हटाने की मांग की थी और अपनी मांग पूरी कराने के लिए उन्होंने धरना भी दिया था और सरकार को कुछ समय बाद कोरबा कलेक्टर को हटाना पड़ा था।कुछ लोग कह सकते हैं कि साय सरकार ने उनकी एक मांग पूरी कर दी तो ननकीराम कंवर को चुप बैठना चाहिए। ननकीराम कंवर जैसे नेता चुप बैठने वाले नेता होते तो वह कोरबा कलेक्टर को हटाने की मांग ही क्यों करते। वरिष्ठ नेता हैं,सत्ता का सब सुख भोग लिया दूसरे वरिष्ठ नेताओं की तरह घर में बैठकर आराम करते।वह चुप बैठने वाले नेता नहीं है इसलिए एक मांग पूरी होने के बाद अब दूसरी मांग कर दी है।
इससे तो साय सरकार की परेशानी बढ़ गई है। दो साल में साय सरकार ने भ्रष्टाचार के मामले मे जीरो टालरेंस की नीति अपनाई है सरकार की छबि भ्रष्टाचार सहन न करने वाली सरकार की बनाई जा रही है। कांग्रेस सरकार के समय जितन भी घोटाले हुए है, उनकी जांच कराई जा रही है और कई लोगों को जेल भेजा गया है। यही नहीं आए दिन जहां से भी और जिस विभाग से घूसखोरी या भ्रष्टाचार की शिकायत मिलती है तो साय सरकार तत्परता से कार्रवाई कर रही है। ऐसे में वह ननकीराम कंवर के आरोपों के गंभीरता नहीं लेती हैं तो ननकीराम कंवर फिर धरना देकर सरकार की परेशानी बढ़ा सकते हैं, इससे विपक्ष को कहने का मौका मिलेगा कि भाजपा नेता ही भ्रष्टाचार की शिकायत कर रहे हैं, इसका मतलब है कि साय सरकार में भ्रष्टाचार हो रहा है और साय सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है। इससे तो विपक्ष काे साय सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति पर सवालिया निशान लगता है।
किसी भी पार्टी में ननकीराम कंवर जैसे नेता अपनी ही पार्टी के खिलाफ क्यों खड़े हो जाते हैं।यह हर राजनीतिक दल की समस्या होती है कि पार्टी चाहती है कि पुराने नेता जिनको पार्टी ने बहुत कुछ दे दिया है।वह रिटायर हो जाए और आराम की जिंदगी गुजारें। ननकीराम जैसे कुछ लोग होते हैं जो रिटायर ही नहीं होना चाहते।वह चाहते हैं कि उनकी सरकार है तो उनको भी महत्व दिया जाना चाहिए।उनकी बात भी सुनी जानी चाहिए, उनकी बात मानी जानी चाहिए।सरकार उनकी एक बात मान लेती है तो वह समझते हैं कि वह हर बात सरकार से मनवा सकते हैं, उनकी हर बात सरकार मानने के लिए विवश है। यानी सरकार उनकी बात माने तो परेशानी और न माने तो परेशानी। विपक्ष को सरकार के खिलाफ बोलने को एक मुद्दा तो मिल जाता है।

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