पिछली तारीख से पर्यावरणीय मंजूरी पर जयराम रमेश की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
नई दिल्ली{ गहरी खोज }: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता जयराम रमेश द्वारा परियोजनाओं को पिछली तारीख से पर्यावरणीय मंजूरी देने के संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सवाल किया कि याचिकाकर्ता रिट याचिका के माध्यम से अदालत के पूर्व फैसले की समीक्षा कैसे मांग सकते हैं।
सीजेआई ने रमेश की ओर से पेश वकील से कहा, “कृपया हमें बताइए कि यह रिट कैसे सुनवाई योग्य है। हमें इस तरह की रिट याचिकाओं के पीछे की मंशा पता है। एक फैसला दिया गया था। उसे बड़ी पीठ ने समीक्षा में निरस्त कर दिया। अब आप परोक्ष रूप से पुनर्विचार याचिका दायर कर रहे हैं।” सीजेआई ने कहा, “उदाहरणात्मक लागत के लिए तैयार रहिए।” जब पीठ ने याचिका पर सुनवाई में अनिच्छा दिखाई तो वकील ने इसे वापस लेने की अनुमति मांगी। पीठ ने उन्हें कानून के अनुसार उपलब्ध उपाय अपनाने की स्वतंत्रता के साथ याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।
पिछले वर्ष 18 नवंबर को अपने ही फैसले को पलटते हुए शीर्ष अदालत ने भारी जुर्माना अदा करने की शर्त पर पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को केंद्र और अन्य प्राधिकरणों द्वारा पिछली तारीख से पर्यावरणीय मंजूरी देने का मार्ग प्रशस्त किया था। अदालत ने कहा था कि अन्यथा “हजारों करोड़ रुपये व्यर्थ चले जाएंगे।”
शीर्ष अदालत ने 2:1 के बहुमत से कहा था कि सार्वजनिक धन से करीब 20,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित अनेक महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजनाएं ध्वस्त करनी पड़ेंगी, यदि 16 मई के उस फैसले को वापस नहीं लिया गया, जिसमें केंद्र को पिछली तारीख से पर्यावरणीय मंजूरी देने से रोका गया था। गुरुवार की सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि उन्होंने नई रिट याचिका क्यों दायर की है। पीठ ने कहा, “आप जानते हैं कि अब तीन-न्यायाधीशों की पीठ इस पर निर्णय दे चुकी है।” वकील ने जनवरी के एक कार्यालय ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा कि इसे शीर्ष अदालत के फैसले को लागू करने के लिए जारी किया गया था।
वकील ने कहा, “मैं कह रहा हूं कि एक्स-पोस्ट फैक्टो मंजूरियां गलत हैं और मेरा कहना है कि कारण-ए-कार्यवाही फैसले के बाद ही उत्पन्न हुआ।”
इस पर सीजेआई ने पूछा, “तो क्या आप रिट याचिका के माध्यम से किसी फैसले को चुनौती दे सकते हैं? जब यह अदालत फैसला देती है और सरकार उस फैसले के अनुपालन में अधिसूचना जारी करती है, तो आप उस अधिसूचना को चुनौती देंगे?” उन्होंने यह भी कहा कि याचिका केवल मीडिया के लिए दायर की गई है। वकील ने कहा कि यदि पीठ सुनवाई के इच्छुक नहीं है तो वह याचिका वापस ले लेंगे। पीठ ने कहा, “यदि आप फैसले से आहत हैं तो आपको अपना उपाय पता है। आप रिट याचिका में फैसले की समीक्षा कैसे मांग सकते हैं?”
