विजया एकादशी 13 फरवरी को, नोट कर लें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत कथा
धर्म { गहरी खोज } : फाल्गुन महीना चल रहा है और इस महीने में विजया एकादशी और आमलकी एकादशी पड़ती है। अभी फाल्गुन महीने का कृष्ण पक्ष है तो इस दौरान विजया एकादशी मनाई जाएगी। पंचांग अनुसार विजया एकादशी की तिथि 12 फरवरी 2026 की दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से शुरू होकर 13 फरवरी की दोपहर 2 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। लेकिन उदया तिथि के अनुसार विजया एकादशी व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा। यहां आप जानेंगे विजया एकादशी व्रत का मुहूर्त, पूजा विधि, कथा, मंत्र, आरती समेत संपूर्ण जानकारी।
फरवरी में एकादशी कब है 2026
फरवरी में विजया एकादशी 13 फरवरी 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस एकादशी का पारण समय 14 फरवरी की सुबह 07 बजे से 09:14 बजे तक रहेगा।
विजया एकादशी मुहूर्त 2026
- लाभ – उन्नति – 08:25 AM से 09:48 AM
- अमृत – सर्वोत्तम – 09:48 AM से 11:12 AM
- शुभ – उत्तम – 12:35 PM से 01:59 PM
- लाभ – उन्नति – 09:22 PM से 10:59 PM
विजया एकादशी व्रत कथा
विजया एकादशी की पौराणिक कथा अनुसार जब भगवान श्री राम माता सीता को रावण से मुक्त कराने के लिए लंका की ओर प्रस्थान कर रहे थे, तब उनकी सेना के सामने समुद्र को पार करने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी। समुद्र को बिना किसी साधन के पार करना असंभव प्रतीत हो रहा था। तभी वनार सेना के किसी सदस्य ने सुझाव दिया कि पास के वन में ऋषि वकदाल्भ्य का आश्रम है उनकी सलाह लेना अवश्य लाभकारी होगी। भगवान श्रीराम तुरंत ऋषि बकदाल्भ्य के पास पहुंचे और उन्हें अपनी समस्या बताई। तब ऋषि ने भगवान राम को विजया एकादशी व्रत के बारे में बताया और कहा कि अगर वे इस व्रत को विधि-विधान से करेंगे तो उन्हें अपने कार्य में सफलता अवश्य मिलेगी। ऋषि ने कहा कि इस एकादशी व्रत को करने से बड़े से बड़ा कार्य भी सिद्ध हो जाता है।
इसके बाद भगवान श्री राम, लक्ष्मण जी और पूरी वानर सेना ने पूरी श्रद्धा से विजया एकादशी का व्रत रखा और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा की। साथ ही रात्रि में जागरण भी किया। व्रत के प्रभाव से भगवान श्रीराम को दिव्य सहायता प्राप्त हुई। अगले ही दिन समुद्र देव प्रकट हुए और उन्होंने समुद्र पार करने का मार्ग बताया। इसके बाद नल और नील ने सेतु निर्माण का कार्य आरंभ किया और देखते ही देखते रामसेतु तैयार हो गया। इस प्रकार भगवान श्रीराम ने अपनी सेना सहित समुद्र पार कर लंका पर विजय प्राप्त की और माता सीता को मुक्त करा लिया। तभी से ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति इस एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियम से करता है, उसे जीवन में आने वाली कठिनाइयों पर विजय प्राप्त होती है।
विजया एकादशी 2026 की पूजा विधि
- विजया एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- फिर घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
- हाथ में फूल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।
- भगवान को पीले फूल, फल, धूप दीप, तुलसी दल और नैवेद्य चढ़ाएं।
- फिर विजया एकादशी की व्रत कथा पढ़ें। साथ ही ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें।
- फिर दिन भर व्रत रहें। ये व्रत आप निर्जल, फलाहार या एक समय भोजन करके भी रख सकते हैं।
- रात्रि में भगवान विष्णु का ध्यान और भजन करें। इस दिन रात्रि जागरण का विशेष महत्व माना जाता है।
- फिर अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को स्नान कर भगवान की फिर से पूजा करें। इसके बाद ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान करें। फिर अपना व्रत खोल लें।
