रंगदारी और धमकी के मामले में आरोपी रवि काना को मिली अग्रिम जमानत, कोर्ट ने रखीं शर्तें
नोएडा{ गहरी खोज }: गौतमबुद्धनगर जिला एवं सत्र न्यायालय ने रंगदारी और जान से मारने की धमकी के एक चर्चित मामले में आरोपी रवि काना को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। सत्र न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव ने 11 फरवरी 2026 को पारित आदेश में कहा कि मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना आरोपी की अग्रिम जमानत स्वीकार की जाती है।
मामला थाना सेक्टर-63 क्षेत्र का है, जहां 14 जनवरी 2026 को शैलेन्द्र शर्मा नामक बिल्डर ने पंकज पाराशर और रवि काना के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, पंकज पाराशर स्वयं को पत्रकार बताता है और वर्ष 2021 से 2024 के बीच उसने प्रोजेक्ट से जुड़े वीडियो बनवाकर उन्हें वायरल करने की धमकी दी। आरोप है कि वीडियो न चलाने के नाम पर करीब 20 लाख रुपये की वसूली की गई। शिकायत में यह भी कहा गया कि पंकज पाराशर के कहने पर रवि काना ने भी कई बार जान से मारने की धमकी दी।
पीड़ित के मुताबिक, 14 अगस्त 2023 को 10 लाख रुपये, 20 अक्टूबर 2023 को 11.96 लाख रुपये और 8 जनवरी 2024 को 1.12 लाख रुपये आरटीजीएस और एनईएफटी के माध्यम से ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा 5 लाख रुपये नकद और अन्य सामान भी दिए जाने का आरोप है। पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी थी। वहीं, आरोपी रवि काना की ओर से दायर अग्रिम जमानत अर्जी में कहा गया कि उसे झूठे तथ्यों के आधार पर फंसाया गया है।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि प्राथमिकी घटना के चार वर्ष बाद दर्ज की गई और धमकी की तिथि, समय व स्थान का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। यह भी कहा गया कि आरोपी के खिलाफ मुख्य रूप से धारा 506 (धमकी) का आरोप है, जो जमानती है, जबकि रंगदारी से संबंधित धाराएं लागू नहीं होतीं। अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए आरोपी को शातिर अपराधी बताया और पूर्व में दर्ज मुकदमों का हवाला दिया।
हालांकि अदालत ने पाया कि प्रत्यक्ष रूप से मृत्यु या गंभीर उपहति के भय का स्पष्ट आरोप नहीं है तथा मामला मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा विचारणीय है। कोर्ट ने आदेश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में आरोपी को 35 हजार रुपए के निजी मुचलके और एक जमानती पर रिहा किया जाए। साथ ही, आरोपी को सात दिन के भीतर विवेचक के समक्ष उपस्थित होकर जांच में सहयोग करना होगा, किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करेगा और बिना अनुमति देश नहीं छोड़ेगा।
