बार बार झूठ बोलने से झूठ सच नहीं हो जाता
सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }: राजनीति में कई राजनीतिक दल व नेता भले मानते हों कि वह झूठ कहने पर खबरों में बने रहते हैं और उनकी चर्चा होती है लेकिन झूठ की पोल तो एक दिन खुलती है,जनता को एक दिन समझ आ जाता है कि सच्चा कौन हौ और झूठा कौन है। चुनाव में जनता सच्चे को चुनती है और झूठे को नकार देती है। पिछले कई चुनावों में जनता ऐसा कर चुकी है, इसके बाद देश के कई राजनीतिक दलों व उनके नेताओं का यह वहम बना हुआ है कि जनता को वह धोखा दे सकते हैं, वह झूठ कहकर जनता को गुमराह कर सकते हैं। हर बार वो झूठ कहते हैं और हर बार उऩकी झूठ की पोल खुल जाती है और उसका उनको राजनीतिक नुकसान भी उठाना पड़ा है इसके बाद भी देश का विपक्ष व कई राजनीतिक दल इससे कोई सबक नहीं ले रहे हैं।
कई राजनीतिक दल व उनके नेता कई बार झूठ कह चुके हैं,जनता अच्छे से जानती है कि इस देश में कौन सा राजनीतिक दल व उसके नेता झूठ की राजनीति करते हैं और सोचते हैं कि वह जनता को धोखा दे सकते हैं, वह मानते हैं कि वह बार बार झूठ कहते रहेंगे और जनता को झूठ का पता नही चलेगा ऐसा न तो पहले हुआ और न ही आगे होने वाला है। इसके बाद कई राजनीतिक दल संसद में रोज झूठ बोल रहे हैं कि लोकसभा अध्यक्ष राहुल गांधी को बोलने नहीं दे रहे हैं, वह महिला सांसदों पर आरोप लगाकर संसद की गरिमा गिरा रहे हैं।उनको निष्पक्ष होना चाहिए वह सरकार के दवाब में फैसले कर रहे हैं।वह राहुल गांधी से बोलने देने का वादा कर वादे से मुकर गए।कुल मिलाकर विपक्ष हमेशा की तरह झूठ की राजनीति कर रहा है और स्पीकर रोक रहे हैं तो उन पर हमला किया जा रहा है कि वह निष्पक्ष नहीं है।
कुल मिलाकर बात इतनी है कि राहुल गांधी संसद में नियमो का पालन नहीं करते है, इस बार भी वह नियम विपरीत सेना अधिकारी नरवणे की किताब की कुछ लाइन संसद में पढ़ना चाहते थे,तोकि संसद में वह कह सकें कि पीएम मोदी डरपोक नेता हैं।यह नियम के विपरीत था इसलिए स्पीकर ओम बिरला ने अनुमति नहीं दी तो राहुल गांधी बोलने पर अड़े रहे। कांग्रेस व विपक्ष ने कई दिनों तक इस बात पर हल्ला किया कि संसद में राहुल गांधी को बोलने नहींं दिया जा रहा है, यह कोई नहीं बता रहा हैकि उनको बोलने क्यों नहीं दिया जा रहा है। वह नियम के खिलाफ बोलना चाहते हैं इसलिए बोलने नहीं दिया जा रहा है। राहुल गांधी को स्पीकर ने बोलने नहीं दिया तो बदले में विपक्ष ने योजना बनाई कि वह भी पीएम को लोकसभा नहीं बोलने देगे। इसके लिए कांग्रेस की महिला सांसदों को उपयोग करने की योजना थी। पीएम मोदी आते तो उनके सामने ऐसा कुछ किया जाता कि वह बोल नहीं पाते।
कांग्रेस की यह योजना स्पीकर ओम बिरला की सजगता से सफल नहीं हुई। बिरला ने संसद में कुछ अप्रत्याशित न हो इसके लिए पीएम मोदी को संसद आने से मना कर दिया और पीएम मोदी उस दिन संसद नही आए तो कांग्रेस जो कुछ करना चाहती थी वह नहीं कर पाई। राहुल गांधी ने भी कहा था कि मुझे नहीं लगता कि पीएम मोदी संसद आएंगे, महिला सांसदों ने पीएम आसन को घेराव किया,उनके आने के रास्ते में खडी़ रही। इससे साफ हो जाता है कि वह कुछ करने वाली तो थी।गलत विपक्ष व कांग्रेस के सांसद करने वाले थे, नही कर पाए और उल्टा पीएम मोदी को कह रहे हैं कि वह सच्चाई का सामना नहीं करना चाहते इसलिए संसद नहीं आए। बिरला ने संसद में अप्रत्याशित कुछ न हो इसे रोका तो कांग्रेस की महिला सांसद उन पर आरोप लगा रही है कि उन्होंने महिला सांसदों पर आरोप लगाकर संसद की गरिमा कम की है।
कांग्रेस व उसके सांसद अपने आचार विचार से गलत साबित होते रहते हैं और वह देश की जनता को गुमराह करने के लिए हमेशा खुद को सही साबित करने का प्रयास करते हैं लेकिन सही होते नहीं इसलिए झूठे ही साबित होते हैं। खुद को सही साबित करने के लिए और स्पीकर को गलत साबित करने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। इससे पहले विपक्ष २०१८ और २०२३ में अविश्वास प्रस्ताव ला चुका है और पारित नहीं करा सका है। वह अपनी भड़ास निकालने के लिे ऐसा करता है, इस बार भी वह अपनी भड़ास निकालने के लिए अविश्वास प्रस्ताव ला रहा है। इससे वह सच्चा तो साबित नहीं होने वाला है क्योंकि वह हमेशा झूठ की राजनीति करता है और जनता उसे इसी वजह से चुनाव में नकार देती है।झूठ बोलकर राजनीति में कोई सच्चा नहीं बन सकता और कांग्रेस ही करने का प्रयास कर रही है और मुंह की खा रही है।
