बजरंग दल की दो दिवसीय अखिल भारतीय बैठक का शुभारंभ

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लखनऊ{ गहरी खोज } :लखनऊ के एस.आर. इंस्टीट्यूट में बजरंग दल की दो दिवसीय अखिल भारतीय बैठक का शनिवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे, संत रामशरण दास महाराज और इंस्टिट्यूट के चेयरमैन पवन सिंह चौहान ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक किशन प्रजापति, विहिप के क्षेत्र संगठन मंत्री गजेन्द्र सिंह और देश भर से आए बजरंग दल के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
उद्घाटन के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मिलिंद परांडे ने कहा कि देश में जिहादी हिंसा का मुद्दा लगातार बढ़ रहा है। कुछ लोग हिंसा के आधार पर हिंदू समाज को डराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हिंदू समाज इस गलतफहमी को दूर करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि देश में सर्वाधिक गौ-रक्षा का कार्य बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने किया है। अब बजरंग दल के कार्यकर्ता मतांतरण रोकने के कार्य में भी सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि बजरंग दल ने निश्चय किया है कि हम युवाओं को आत्मनिर्भर व स्वावलम्बी बनायेंगे। पिछले वर्ष 14 हजार लोगों को स्वरोजगार से जोड़ा गया है। हमारा लक्ष्य है कि हर विभाग में इस प्रकार का काम खड़ा हो। देश में 34 लाख युवा बजरंग दल से जुड़े हैं। इस वर्ष 01 करोड़ से अधिक हित चिंतक बनाये जायेंगे।
परांडे ने युवाओं में बढ़ती नशाखोरी पर चिंता जताते हुए कहा कि पिछले वर्ष अक्टूबर-नवंबर में प्रत्येक राज्य में पांच हजार से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कई स्थानों पर ‘रन फॉर हेल्थ’ जैसे कार्यक्रम भी हुए हैं। आगे भी इस विषय पर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बजरंग दल का उद्देश्य ऐसा हिंदू युवा तैयार करना है जो सद्गुणों से युक्त, शक्तिसंपन्न और चरित्रवान हो। इसी उद्देश्य से बजरंग दल शौर्य प्रशिक्षण वर्गों का आयोजन करता है।
उन्होंने कहा कि आगामी जनगणना के दौरान हिंदू समाज को अपनी पहचान स्पष्ट रूप से ‘हिंदू’ लिखना चाहिए। इस विषय पर बजरंग दल जन-जागरण अभियान चलाएगा, क्योंकि कुछ लोग यह भ्रम फैला रहे हैं कि हिंदुओं को स्वयं को हिंदू नहीं लिखना चाहिए।
विहिप के प्रांत संगठन मंत्री विजय प्रताप ने बताया कि इस बैठक में देशभर के सभी राज्यों से बजरंग दल की प्रांत स्तरीय टोली के कार्यकर्ता शामिल हुए हैं। इन बैठकों में हिंदू समाज के सामने मौजूद संकटों और चुनौतियों पर गंभीर चर्चा की जाती है।

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