मोदी की लोकप्रियता कम कहां होती है

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सुनील दास

संपादकीय { गहरी खोज }: राजनीति में होशियार नेता वह होता है जो जनहित व देशहित के काम करके यश प्राप्त करता है, लोकिप्रिय होता है। काम करने के कारण ही उसकी लोकप्रियता बढ़ती जाती है।उनकी लोकप्रियता उनकी आलोचना करके तो कम नहीं की जा सकती क्योंकि वह लोकप्रिय इसलिए हैं कि जनता को उनका काम देश में दिखता है, काम का लाभ जनता को मिलता है। लोगों को दिखता है कि देश सुरक्षित है और वह निरंतर विकास कर रहा है।उससे ज्यादा लोकप्रिय होने का एक रास्ता तो यह है आप उससे अच्छा काम करके दिखाओ। यह रास्ता कठिन होता इसलिए ज्यादातर नेता खुद को खबरों मे बनाए रखने के लिए लोकप्रिय नेता की रोज आलोचना किसी न किसी बात के लिए करते रहते हैं।इससे वह लोकप्रिय नहीं होते हैं, इससे तो जनता को यही पता चलता है कि यह काम करने वाले नेता नहीं है, यह सिर्फ बात करने वाले नेता हैं।
सब जानते हैं कि मोदी पिछले ११ साल से पीएम हैं और उनकी लोकप्रियता कम करने के आए दिन प्रयास राहुल गांधी सहित विपक्ष के नेता करते हैं लेकिन यह हकीकत है और सब जानते हैं कि पीएम मोदी की लोकप्रियता ११ सालों में कम नहीं हुई है और इसका प्रमाण है लगातार तीन बार लोकसभा का चुनाव जीतना और कई राज्यों के विधानसभा चुनाव विपक्ष दलों को हराना, कई राज्यों मे अपनी सरकार होने पर दूसरी व तीसरी बार चुनाव जीतना। जनता मानती है कि पीएम मोदी ने देश व जनता के लिए ऐसे काम किए हैं जो दूसरे दल ने सत्ता में रहने पर भी नहीं किए। देश की सुरक्षा का मजबूत करना और देश पर हमला करने वालों को मुंहतोड़ जवाब देना। वह देश के लोगों की नजर मे मजबूत नेता है क्योकि देश की सुरक्षा के लिए उन्होंने जो कुछ किया है, दूसरे विपक्षी दलों के नेता सत्ता मे रहने पर सोच भी नहीं सके हैं। खुद देश की रक्षा के लिए कुछ कर नहीं पाए हैं पीएम मोदी ने पाकिस्तान को तीन तीन बार आतंकवादी हमला करने पर सबक सिखाया है तो वह सरकार से सबूत मांगते रहे हैं।
पाकिस्तान के अलावा चीन को भी भारत ने जब भी मौका मिला है, बता दिया है कि यह कांग्रेस के समय वाला भारत नहीं है जो भारत की हजारों वर्ग किमी जमीन पर कब्जा कर लेने पर कुछ नही कर सका जबकि कांग्रेस की सरकार पचास साल से ज्यादा समय तक सत्ता में रही।चीन भारत के खिलाफ युध्द की तैयारी कर रहा था और तब के पीएम जवाहर लाल नेहरू देश की रक्षा के लिए कुछ नही कर सके।वह अमरीका का पत्र लिखते हैं युध्द में मदद करने के लिए और अमरीका कोई मदद नहीं करता है,पं. नेहरू गुट निरपेक्ष आंदोलन के बड़े नेता और एक भी देश चीन के साथ युध्द के समय भारत के साथ खड़ा नहीं हुआ। यह कांग्रेस सरकार व तब के पीएम नेहरू की यह बड़ी असफलता है और इस पर कई किताबं लिखी गईं है कि चीन के साथ युध्द के दौरान पं. नेहरू ने क्या क्या गलती की और उसका भारत का क्या क्या नुकसान हुआ।
राहुल गांधी आज देश को एक सेना अधिकारी की अप्रकाशित पुस्तक की चार लाइन पढ़कर देश को बताना चाहते हैं कि चीन की सेना जब सीमा पर आगे बढ़ रही थी तो पीएम मोदी ने सेना के अधिकारी से कहा कि तुम जो उचित समझो वह करो।सेना अधिकारी यह भी समझ सकता था कि पीएम मोदी उऩको खुली छूट दे दी है लेकिन उसने यह समझा कि पीएम मोदी ने सेना को अकेला छोड़ दिया। इसका राहुल गांधी यह मतलब निकाल रहे है कि पीएम मोदी ने सेना को कोई आदेश नहीं किया।उन्होंने सेना पर ही फैसला छो़ड़ दिया। जब चीन व भारत की सेना सीमा पर आमने सामने थी तो पीएम मोदी के मजबूत फैसले के कारण महीनों तक चीनी सेना एक कदम आगे नहीं बढ़ सकी थी, गलवान मे चीनी सैनिकों के घुसने का प्रयास करने पर भारतीय सैनिकों से चालीस से ज्यादा चीनी सैनिकों को मारकर जो सबक सिखाया था वह देश को याद है, तब पीएम मोदी से सेना को खुली छूट दी थी और सेना ने फील्ड पर जो ठीक समझा किया था।
पहलगाम में आतंकवादी हमला होने पर जब २० से ज्यादा भारतीय मारे गए थे तो तब भी पीएम मोदी ने सेना को खुली छूट दी थी इसका मतलब यह तो नहीं था कि सेना तत्काल पाकिस्तान पर हमला कर दे। राहुल गांधी जैसे लोग तो इस बात की आलोचना कर रहे थे कि सेना हमला करने में देरी क्यों कर रही है। पीएम मोदी ने सेना को आतंकवादियों के ठिकानों को नष्ट करने का आदेश दिया था,तैयारी में समय लगता था,सेना ने तैयारी की और सबको पता है कि आपरेशन सिंदूर सफल रहा था। पाकिस्तान ने सैन्य कार्रवाई बंद करने की फरियाद की तब भारत ने सैन्य कार्रवाई रोक दी थी साथ यह भी कहा था कि आपरेशन सिंदूर जारी है यदि पाकिस्तान ने फिर आतंकवादी हमला किया तो भारत फिर से सैन्य कार्रवाई करेगा। राहुल गांधी मजबूत पीएम मोदी को डरपोक पीएम साबित करना चाहते है तो कांग्रेस के कमजोर पीएम का इतिहास बताना पड़ता है कि कमजोर पीएम तो कांग्रेस के हुए हैं, पीएम मोदी तो कहते हैं कि घर में घुसकर मारेंगे और मारकर दिखाते भी हैं।

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