बिहार में भूमि सर्वेक्षण से होगा समस्याओं का समाधान: विजय कुमार सिन्हा
पटना{ गहरी खोज }: बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने गुरुवार को भूमि सर्वेक्षण को लेकर तय किए गए लक्ष्यों को फिर से दोहराया। उन्होंने दावा किया कि भूमि सर्वेक्षण राज्य की कई जटिल और पुरानी समस्याओं का स्थायी समाधान है।
पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान डिप्टी सीएम ने भूमि सर्वेक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि सरकार से लेकर समाज तक, सभी को मिलकर इस दिशा में काम करना होगा। डिप्टी सीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक की इच्छा है कि बिहार को तभी विकसित बनाया जा सकता है, जब छोटी-छोटी लेकिन जमीनी समस्याओं से राज्य को मुक्त किया जाए। विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को समस्या-मुक्त बिहार देना हम सबकी जिम्मेदारी है। भूमि सर्वेक्षण केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह पारिवारिक विवादों को कम करेगा, सामाजिक शांति को मजबूत करेगा और समाज में सौहार्द बढ़ाने का काम करेगा।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि स्पष्ट भूमि रिकॉर्ड होने से जमीन से जुड़े झगड़े खत्म होंगे, जिससे गांव से लेकर शहर तक शांति और स्थिरता कायम होगी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में खुद केस लड़ने को लेकर पूछे गए सवाल पर डिप्टी सीएम ने तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी के दिल में सच में राष्ट्र और बंगाल के प्रति ममता होती, तो उनकी प्राथमिकताएं अलग होतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के भीतर सिर्फ सत्ता की ममता है, न कि समाज, बंगाल या राष्ट्र के लिए कोई संवेदना। उनके फैसले और रवैये से यह साफ झलकता है कि जनता के हित उनके एजेंडे में नहीं हैं। वहीं, उपेंद्र कुशवाहा की ओर से पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए डिप्टी सीएम ने इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि पाटलिपुत्र एक ऐतिहासिक नाम है और प्राचीन काल में यही इस क्षेत्र की पहचान थी। पटना का नाम भी मां पटन देवी के नाम पर पड़ा है, जो इसकी धार्मिक आस्था को दर्शाता है। उन्होंने याद दिलाया कि यह क्षेत्र मगध की राजधानी रहा है और अखंड भारत का एक प्रमुख केंद्र बिंदु रहा है। विजय कुमार सिन्हा ने आगे कहा कि पाटलिपुत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को जानने और उस पर गर्व करने का अधिकार हर नागरिक को है। जब लोग अपने गौरवशाली अतीत की चर्चा करते हैं, तो इसमें किसी प्रकार की आपत्ति या समस्या नहीं होनी चाहिए।
