गलती खुद करना और गलत दूसरों को ठहराना

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सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }:
राजनीति में कई बार ऐसा होता है कि एक राजनीतिक दल या उसका नेता गलती तो खुद करता है लेकिन दिखावा वह ऐसा करता है जैसे गलती उसकी जरा भी नहीं है, सारी गलती तो सामने वाले है। वह तो अपनी जगह १०० प्रतिशत सही है लेकिन सामने वाला पूरी तरह गलत है और उसके साथ गलत कर रहा है क्योंकि सरकार उसको ऐसा करने को कह रही है और वह सरकार के कहने पर ही ऐसा कर रहा है। राहुल गांधी व ममता बैनर्जी ऐसे ही नेता और उनका राजनीतिक दल यही करता है। दोनों नेता अपनी गलती को गलती नहीं मानते हैं।वह ऐसा दिखावा करते हैं कि गलती उनसे नहीं हुई है, गलती तो सामने वाले से हुई है। हम तो सामंने वाले की गलती देश को बता रहे हैं। हम गलती करने वाले नहीं है, हम तो गलती बताने वाले हैं।
राहुल गांधी तो हर लोकसभा सत्र में ऐसा करते हैं, इससे तो देश के लाेग भी समझ गए हैं कि राहुल गांधी हमेशा लोकसभी में गलती करते है और बाहर आकर विक्टिम कार्ड खेलते हैं कि लोकसभा में उनको बोलने नहीं दिया जाता है , उनका माइक बंद कर दिया जाता है। वह किसी विषय पर बोलना चाहते हैं तो उनको उस विषय पर बोलने नहीं दिया जाता है।हर बार यह बताते हैं कि उनको बोलने नहीं दिया गया लेकिन यह नहीं बताते हैं कि उनको संसद के भीतर क्यों नहीं बोलने दिया गया,वह यह नहीं बताते हैं कि नियमों का पालन नहीं करते हैं, इसलिए उनको बोलने की इजाजत नहीं दी जाती है।इस बार उनको नियम के अनुसार नहीं बोलने पर बोलने की इजाजत नही दी गई तो उन्होंने बाहर तो कहा ही कि संसद के भीतर उनकी आवाज दबा दी गई।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि वह सरकार के इशारे पर उनको सदन में बोलने से रोकते हैं।
उन्होंने पत्र में लिखा है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व हर सदस्य को बोलने का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न अंग है।लेकिन इस बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों को दरकिनार करने के कारण एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है।राहुल गांधी इस तरह का आरोप लोकसभाअध्यक्ष पर इसलिए लगा रहे हैं ताकि चर्चा उनकी गलती की न हो, चर्चा का विषय उनकी संसद के भीतर की गई गलती न रहे बल्कि देश में चर्चा का विषय का यह रहे कि लोकसभा अध्यक्ष राहुल गांधी को संसद में बोलने नहींं दे रहे इस बात की रहे। राहुल गांधी हमेशा नियम के खिलाफ कुछ भी करते हैं और चाहते हैं कि संसद के भीतर उनको कोई रोके नहीं । लोकसभा अध्यक्ष का काम संसद के नियमों के अनुसार चलाना है और वह स्वाभाविक रूप से यही करते हैं तो राहुल गांधी व विपक्ष के नेताओं का यही अच्छा नहीं लगता है और वह उनको बुरा बनाने का प्रयास करते हैं।
राहुल गांधी के अलावा ममता बैनर्जी भी ऐसी नेता है, वह हर चुनाव के पहले क्या कुछ गलत करती है, उनकी पार्टी के लोग क्या कुछ गलत करते हैं यह पूरा देश जानता है। पं. बंगाल में चुनाव के पहले एसआईआर होना है, ममता नहीं चाहती थी कि पं. बंगाल में चुनाव के पहले एसआईआर न हो लेकिन वह इसे कई तरह के हथकंडे अपना कर नहीं रोक पाई हैं। इसी वजह से वह चुनाव आयोग पर आए दिन तरह तरह के आरोप लगाती रहती है और यह प्रचार करती रहती है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं हैं,चुनाव आयोग मोदी सरकार के इशारे पर काम कर रहा है। हाल ही में वह दिल्ली चुनाव मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने आई थी और बैठक बीच में ही छोड़कर चली गई और कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनका अपमान किया। इसके बाद उन्होंने मीडिया से यह कहा कि बंगाल में मतदाता सूची से टीएमसी समर्थक लोगों का नाम हटाया जा रहा है।
राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष पर दवाब डालने के लिए जहां उनको पत्र लिखा है, वहीं ममता बैनर्जी ने कहा है कि कांग्रेस यदि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाती है तो वह कांग्रेस का समर्थन करेंगी। यानी पहले तो मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ राहुल गांधी ही जमकर बोलते रहे हैं और राहुल गांधी के बाद ममता बेनर्जी बोलने लगी है और वह चाहती हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए विपक्ष को महाभियोग लाना चाहिए और विपक्ष यदि ऐसा करता है तो वह विपक्ष का समर्थन करेंगी। ममता खुद तो अपने लिए विपक्ष का समर्थन चाहती हैं लेकिन वह पं.बंगाल में विपक्ष के राजनीतिक दलों के साथ चुनाव नहीं लड़ना चाहती हैं। ऐसे में विपक्ष महाभियोग के मामले में कैसे ममता के साथ खड़ा हो सकता है। राहुल गांधी व ममता बैनर्जी दोनों अपने मन की करना चाहते है और यह भी चाहते हैं कि कोई उनको गलत न करे। लोकतंत्र में तो ऐसा हो नहीं सकता।

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