देश की जनता जानती है, मजबूत पीएम कैसा होता है
सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }: देश में लोकतंत्र है और बुरी बात यह है कि बहुत सारे परिवारवादी राजनीतिक दल है,सारे तानाशाही पसंद करते हैं यानी परिवार जो चाहे वही सही, परिवार जो कहे वही सही, परिवार जो करे वही सही। ऐसे लोग कितनी लोकंतत्र बचाने व संविधान बचाने की बात करें लेकिन हकीकत में लोकतांत्रिक मूल्यों में संविधान में इनका कोई यकीन नहीं होता है।हर देश मेंं संसद के नियम होते हैं, परंपरा होती है और संसद नियम व परंपरा से चलता है। लेकिन परिवारवादी दल जब विपक्ष में होते हैं तो वह चाहते हैं कि संसद उनकी इच्छा से चले।संसद उऩकी इच्छा से तो चल नहीं सकता इसलिए वह हंगामा कर संसद नहीं चलते देते हैं और अपने इस अलोकतांंत्रिक आचरण को वह लोकतांत्रिक मानते हैं और चाहते हैं कि देश भी उनके इस आचरण को सही माने और वाहवाही करे।
इस देश में लोकतंत्र की जड़े मजबूत हैं, इसलिए इस देश में जो भी नियम व कानून को नहीं मानता है तो देश के लोग उसकी आलोचना करते हैं और उसके साथ खड़े नहीं होते हैं। राहुल गांधी संविधान की प्रति लेकर घूमते है, बताते हैं कि देश में संविधान खतरे में है, वह संविधान के रक्षक है, संविधान क्या है कानून व नियम ही तो है। देश में सब कुछ कानून व नियम से चलता है। ऐसे में राहुल गांधी संसद में नियम के विपरीत होने के बाद भी चाहते हैं कि उनको नियम के विपरीत संसद में वह सब बोलने दिया जाए जो वह बोलना चाहते है। संसद में अनुभवी लोग उनको बता रहे हैं कि वह जो कुछ कहना चाहते हैं उसे कहने की इजाजत नही दी जा सकती क्योंकि नियम इसकी इजाजत नहीं देते हैं और नियम भी कोई मोदी सरकार के समय के बने हुए नहीं है, वह आजादी के बाद से बने हुए हैं और सब उसका पालन करते आए हैं और राहुल गांधी उसका पालन नहीं करना चाहते हैं।
सवाल उठना स्वाभाविक है कि राहुल गांधी संसद में क्या कहना चाहते हैं,क्यों कहना चाहते हैं. संसद के भीतर उनको जो बोलने नहीं दिया गया वह संसद के बाहर भी तो कह सकते हैं लेकिन दूसरों को डरपोक कहने वाले राहुल गांधी संसद के बाहर वह नहीं कह सके जो वह संसद के भीतर कहना चाहते हैं। क्योंकि वह खुद डरपोक है,उनको डर है कि वह संसद के भीतर जो कह सकते हैं, वह संसद के बाहर कहेंगे तो उन पर मानहानि का केस हो सकता है और ऐसे कई मामलों में उनको सुप्रीम कोर्ट से फटकार लग चुकी है और माफी मांगनी पड़ी है। राहुल गांधी जानते हैं कि संसद के भीतर वह जो कुछ कहना चाहते हैं, उसके बाद उन पर बाहर कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता लेकिन संसद के बाहर वह कुछ कहते हैं तो उन पर मानहानि का केस किया जा सकता है।
राहुल गांधी संसद के भीतर क्या करना चाहते है, यह कोई छिपी हुई बात तो हैं नहीं, वह एक मैगजीन मे छपी लेख के आधार पर संसद के भीतर पीएम मोदी को डरपोक पीएम कहना चाहते हैं, वह बताना चाहते हैं कि चीन का सामना पीएम मोदी ने गलवान में ठीक से नहीं किया.यह कोई नई बात नहीं है, राहुल गांधी तो जब मौका मिलता है वह पीएम मोदी को डरपोक कहते हैं, लेकिन उनके कहने से तो पीएम मोदी को जनता डरपोक नहीं मान सकती क्योंकि जनता जानती है कि डरपोक पीएम तो तब देश में थे, जब देश की संसद पर हमला हुआ था और देश के पीएम पाकिस्तान के खिलाफ कुछ नहीे कर पाए थे जबकि सेना पाकिस्तान पर हमला करने के आदेश का इंतजार कर रही थी। तब पीएम ने हमले का आदेश क्यों नहीं दिया था यह सारा देश जानता है। अमरीका चाहता था भारत पाकिस्तान पर हमला न करे इसलिए तत्कालीन पीएम ने हमले का आदेश सेना को नहीं दिया था।
राहुल गांधी संसद के भीतर क्या संसद के बाहर कितनी बार भी कह लें कि पीएम मोदी डरपोक पीएम हैं, वह चीन से डरते हैं, लेकिन देश की जनता उनकी इस बात पर यकीन करने वाली नहीं है, उसने देखा है कि इस देश में चीन को भाई बताकर चीन से हारने वाले पीएम कैसे होते है, पाकिस्तान के आतंकवादी हमलों का जवाब इस डर से नहीं देने वाले पीएम देखें हैं कि देश के मुसलमान नाराज हो जाएंगे।इस देश ने पहली बार देखा देश का पीएम मजबूत हो तो पाकिस्तान को एक नहीं कई बार कैसे जवाब दिया जाता है. देश के लोगों ने पहली बार देखा है कि आतंकवादी हमला देश में होने पर कैसे पाकिस्तान में बिना घुसे आतंकवादियों के ठिकाने नष्ट किए जा सकते हैं। इस देश के लोगों ने पहली बार देखा है कि मजबूत पीएम वह होता है जो देश की रक्षा के लिए सेना को खुली छूट देता है और सेना खुली छूट पाकर दुश्मन देशों को कैसा जवाब देती है।
