‘वसुधैव कुटुंबकम’ के शाश्वत भारतीय दर्शन को साकार करता है सूरजकुंड शिल्प मेला : सी. पी. राधाकृष्णन

0
625509560_870826689077166_8785686825480721466_n

उपराष्ट्रपति ने किया 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले का उद्घाटन

फरीदाबाद{ गहरी खोज }: 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला-2026 का शनिवार को भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी.राधाकृष्णन ने बतौर मुख्य अतिथि उद्घाटन किया। इसके उपरांत उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला दशकों से भारत की सांस्कृतिक आत्मा, कलात्मक उत्कृष्टता और सभ्यतागत निरंतरता का जीवंत प्रतीक रहा है। यह उत्सव ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के उस शाश्वत भारतीय दर्शन को साकार करता है, जिसमें पूरी दुनिया को एक परिवार माना गया है। यह मेला निर्माण करने वाले हाथों, नवाचार से भरे मस्तिष्कों और हमारी पहचान गढऩे वाली परंपराओं को एक साझा मंच पर एकत्र करता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले लगभग चार दशकों से यह आयोजन हमारे कारीगरों, बुनकरों, मूर्तिकारों, चित्रकारों और लोक कलाकारों को वैश्विक पहचान दिला रहा है, जिनमें से अनेक पीढिय़ों से चली आ रही कलाओं को जीवित रखे हुए हैं। इस वर्ष आत्मनिर्भर भारत पर केंद्रित दृष्टिकोण ने मेले के महत्व को और भी गहन बना दिया है, क्योंकि हमारे कारीगर सदियों पुराने ज्ञान के संरक्षक हैं और उन्हें सशक्त बनाना एक समावेशी, सशक्त और टिकाऊ अर्थव्यवस्था की नींव है। उपराष्ट्रपति ने इस वर्ष के सहभागी राज्य उत्तर प्रदेश और मेघालय का उल्लेख करते हुए कहा कि ये ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करते हैं, जहाँ विविधता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। साथ ही, भागीदार देश मिस्र का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि मिस्र की प्राचीन सभ्यता, सांस्कृतिक गहराई और कलात्मक परंपराएं भारत की ऐतिहासिक यात्रा से गहरे स्तर पर मेल खाती हैं। ऐसी साझेदारियां देशों के बीच सांस्कृतिक कूटनीति को सुदृढ़ करने के साथ-साथ लोगों के बीच संबंधों को भी मजबूत बनाती हैं।
इस मौके पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शिल्प मेले के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सूरजकुण्ड शिल्प मेला हमारी प्राचीन विरासत और आधुनिक सोच का सजीव संगम है। पिछले 38 वर्षों से यह मेला भारतीय लोक कला, संस्कृति और शिल्प परंपराओं को न केवल संरक्षित कर रहा है, बल्कि उन्हें नई पीढ़ी और वैश्विक मंच से भी जोड़ रहा है।
मेले के शुभारंभ अवसर पर उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने मेला परिसर में हरियाणा के अपना घर पवेलियन का दौरा किया, जहां हरियाणवी पगड़ी पहनाकर उनका पारंपरिक स्वागत-सत्कार किया गया। उपराष्ट्रपति ने मेले के थीम स्टेट मेघालय के स्टॉलों का अवलोकन करते हुए शिल्पकारों से संवाद किया तथा उनके हुनर की सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने मेले में सहभागी विभिन्न देशों और राज्यों की सांस्कृतिक विधाओं का अवलोकन कर कलाकारों एवं शिल्पकारों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, मेले में सहयोगी देश मिस्र के एम्बेसडर कमल जायद ग़लाल, कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल, राज्य मंत्री राजेश नागर, खेलमंत्री गौरव गौतम की उपस्थिति रही।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *