धर्मान्तरण कराने वालों को मृत्युदण्ड की सजा का प्रावधान संविधान में हो : नरेंद्रानंद सरस्वती
प्रयागराज{ गहरी खोज }: माघ मेला के त्रिवेणी मार्ग स्थित श्रीकाशी सुमेरुपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती ने धर्म संवाद पण्डाल में आयोजित सन्त सम्मेलन में कहा कि सनातन धर्मावलम्बियों का धर्मान्तरण देश के विरुद्ध एक प्रकार का युद्ध है। इससे एक सनातनी ही कम नहीं होता, अपितु देश का एक शत्रु बढ़ जाता है। धर्मान्तरण को गम्भीर अपराध घोषित किया जाना चाहिए और धर्मान्तरण कराने वालों को मृत्यु दण्ड की सजा का प्रावधान संविधान में किया जाना चाहिए।
शुक्रवार को सम्मेलन में शंकराचार्य ने सम्बोधित करते हुए कहा कि मन्दिरों पर से सरकारी नियंत्रण समाप्त होना चाहिए और मन्दिरों के धन का उपयोग सनातन धर्म के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए और सनातनी समाज के हित में ही होना चाहिए। उन्होंने माघ माहात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि मकर राशि में सूर्य के आने पर माघ मास में स्नान का फल, गौ, भूमि, तिल, वस्त्र, स्वर्ण, अन्न, घोड़ा आदि दानों तथा चांद्रायण और ब्रह्मा कूर्व व्रत आदि से भी अधिक होता है। वैशाख तथा कार्तिक के जप, दान, तप, और यज्ञ बहुत फल देने वाले हैं, परन्तु माघ मास में इनका फल बहुत ही अधिक होता है। माघ मास में स्नान करने वाला पुरुष राजा और मुक्ति के मार्ग को जानने वाला होता है।
दिव्य दृष्टि वाले महात्माओं ने कहा है कि जो मनुष्य माघ मास में सकाम या भगवान के निमित्त नियमपूर्वक स्नान करता है वह अत्यन्त फल वाला होता है। उसको शरीर की शुद्धि, प्रीति, ऐश्वर्य तथा चारों प्रकार के फलों की प्राप्ति होती है। अदिति ने बारह वर्ष तक मकर संक्रांति में अन्न त्याग कर स्नान किया। इससे तीन लोकों को उज्ज्वल करने वाले बारह पुत्र उत्पन्न हुए। माघ मास में स्नान करने से ही रोहिणी सुभगा अरुन्धती दानशील हुईं और इन्द्राणी के समान रूपवती होकर प्रसिद्ध हुईं।
शंकराचार्य ने कहा कि जो माघ मास में स्नान करते हैं व देवताओं के पूजन में तत्पर रहते हैं, उनको सुन्दर स्थान, हाथी और घोड़ों की सवारी तथा दान को द्रव्य प्राप्त होता है और अतिथियों से उनका घर भरा रहता है। उनके घर में सदा वेद ध्वनि होती रहती है। वह मनुष्य धन्य है जो माघ मास में स्नान करते हैं, दान देते हैं तथा व्रत और नियमों का पालन करते हैं और दूसरे पुण्यों के क्षीण होने से मनुष्य स्वर्ग से वापस आ जाता है। परन्तु जो मनुष्य माघ मास में स्नान करता है, वह कभी स्वर्ग से वापस नहीं आता। इससे बढ़कर कोई नियम, तप, दान, पवित्र और पाप नाशक नहीं।
इस अवसर पर सचिव स्वामी बृजभूषणानन्द सरस्वती ने कहा कि समय रहते सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी पर रोक लगाकर देश को जातीय संघर्ष की आग में जलाने की कुत्सित मानसिकता को कुचल डाला है। स्वामी प्रकृष्टानन्द सरस्वती ने सभी सनातन धर्मावलम्बियों के स्वस्थ एवं समृद्ध जीवन की कामना करते हुए कहा कि अगले वर्ष के माघ मेला मेला में आप सब पुनः पधार कर अपने जीवन को धन्य करें। इस अवसर पर कोतवाल स्वामी नारद आश्रम, कोतवाल स्वामी अवनीश आश्रम सहित सैकड़ों दण्डी संन्यासियों एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
