निलंबन के बाद कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठे अलंकार अग्निहोत्री, आवास में बंधक बनाने का आराेप

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बरेली{ गहरी खोज }: उत्तर प्रदेश में बरेली जिले के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री का मामला मंगलवार को और तूल पकड़ गया। सोमवार को उन्होंने शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी कानून के विरोध का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया। अब इस मामले मे उन्हाेंने शासन और प्रशासन के खिलाफ माेर्चा खाेलते हुए समर्थकों के साथ मंगलवार काे कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठ गये।
अलंकार ने कह कि उन्हें निलंबित किए जाने की जानकारी मिली है। इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए उन्हाेंने कोर्ट में चुनौती देने का एलान किया है। इसके बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई। अलंकार ने साेमवार देर रात डीएम से मुलाकात के बाद जिला प्रशासन पर दबाव और बंधक बनाए जाने के आरोप लगाए, जिन्हें डीएम ने सिरे से खारिज कर दिया।
मंगलवार काे अलंकार डीएम से मिलने कलेक्ट्रेट पहुंचे ताे गेट हाेने के कारण वह बाहर ही समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गये। एडीएम कंपाउंड स्थित सिटी मजिस्ट्रेट आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात करते हुए मुख्य गेट बंद कर दिया गया। पुलिस ने ऊपर से आदेश होने की बात कही खबर लिखे जाने तक प्रदर्शन जारी है। गईं।
जानकारी के अनुसार, मंडा बासनी निवासी एवं वर्तमान में लाडनूं के सैनिक स्कूल के पास रहने वाला यह परिवार मेहनत मजदूरी कर अपना जीवन यापन करता था। हादसे में लाडा (12) और अंकिता (10) की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहीं उनकी मां शारदा (47) और बड़ी बेटी अक्षिता (14) गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसे की सूचना मिलते ही लाडनूं के पार्षद इदरीश खान मौके पर पहुंचे और तत्परता दिखाते हुए घायलों को तुरंत लाडनूं के राजकीय अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों की हालत नाजुक बताते हुए उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया।
घटना की सूचना पर पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। डिप्टी जितेंद्र सिंह और सीआई शंभुदयाल मीणा पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने दोनों मृत बच्चियों के शवों को अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है। अधिकारियों ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है और फरार ट्रक चालक की तलाश जारी है।
जानकारी के अनुसार, शारदा के पति गिरधारी (50) लंबे समय से बीमार हैं। परिवार की पूरी जिम्मेदारी शारदा पर ही थी, जो मेहनत मजदूरी कर अपनी तीन बेटियों का पालन-पोषण कर रही थीं। इस हादसे ने परिवार से दो मासूम बेटियों को हमेशा के लिए छीन लिया, जिससे इलाके में शोक की लहर है।

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