रेलवे कर्मचारी की हठधर्मी
-इरविन खन्ना
संपादकीय { गहरी खोज }: भारत 2036 की ओलम्पिक का दावेदार बनने की तैयारी कर रहा है लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू यह भी है कि खिलाड़ियों को मिलने वाले मान-सम्मान देने में भी उदासीनता दिखाई जा रही है। प्रदेशों की सरकारें और केंद्र सरकार देश में खेल और खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए नई-नई योजनाओं की घोषणाएं कर रही है। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए करोड़ों-अरबों रुपए खर्च कर रही है, जबकि कुछ कर्मचारी सरकारों द्वारा किए जा रहे प्रयासों के विपरीत खिलाड़ियों को ही अपमानित कर रहे हैं। अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय चैम्पियनशिप से लौट रहे भारत के राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी पोलवॉल्ट खिलाड़ी देव कुमार मीणा और उनकी टीम को पनवेल में अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा जब उन्हें पोल रेलवे स्टेशन पर ही छोड़कर जाने के लिए कहा गया और काफी मिन्नतें करने तथा जुर्माना भरने के बाद ही उन्हें इसे साथ ले जाने की अनुमति दी गई। जुलाई 2025 में जर्मनी में विश्व यूनिवर्सिटी खेलों में अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तीसरी बार तोड़कर 5.40 मीटर का नया रिकॉर्ड बनाने वाले देव, मंगलुरु में मीट रिकॉर्ड बनाने वाले कुलदीप और उनके साथी खिलाड़ी कोच घनश्याम के साथ मंगलुरु में अखिल भारतीय यूनिवर्सिटी खेलों से हिस्सा लेकर लौट रहे थे। कोच घनश्याम ने बताया कि हम मंगलुरु में अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय चैम्पियनशिप से लौट रहे थे और महाराष्ट्र के पनवेल से भोपाल के लिए ट्रेन लेनी थी। हम स्टेशन के बाहर खाना खाने गए थे और कुछ खिलाड़ी पोल के पास बैठे थे। टीसी ने उनसे पोल हटाने को कहा तो मैंने आकर उन्हें बताया कि यह पोल वॉल्ट है और प्रतिस्पर्धा में भागीदारी का सबूत और पदक भी दिखाया। वहीं कोच ने कहा कि हमने टीसी को दिखाया भी कि पोल कहां रखा जाता है और उससे किसी यात्री को दिक्कत नहीं होती लेकिन वह अड़ गए कि या तो 8000 रुपए चार्ज भरो या पोल यही छोड़कर जाओ। मैंने हाथ जोड़कर कहा कि 8 हजार रुपए मैं कहां से लाऊंगा। और अगर चार्ज भर भी दिया तो, पोल जाएगा कैसे। घनश्याम ने कहा कि हमारी एक ट्रेन भी छूट गई और बहुत मिन्नतें करने के बाद आखिर में 80 किलो का जुर्माना 1875 रुपए लिया जो हमने अपनी जेब से दिया। करीब 4-5 घंटे इसमें लग गए। वहीं मध्य रेलवे के अधिकारी का कहना है कि रेलवे के किसी कर्मचारी की खिलाड़ियों का अपमान करने या उसकी भावना को ठेस पहुंचाने की नियत नहीं थी। कर्मचारी केवल नियम का पालन कर रहा था। रेलवे ने भारतीय खिलाड़ियों को जितना संरक्षण व समर्थन अतीत या वर्तमान में दिया है उतना शायद ही किसी अन्य सरकारी विभाग ने दिया हो। लेकिन एक रेलवे कर्मचारी की हठधर्मी के कारण रेलवे विभाग कटघरे में खड़ा दिखाई दे रहा है। रेलवे विभाग के उच्च अधिकारियों को अपने कर्मचारियों को लोक व्यवहार को लेकर समय-समय पर कैंप लगाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से विभाग बच सके।
