शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को गंगा स्नान से रोके जाने के विरोध में कांग्रेस का धरना-उपवास
भोपाल{ गहरी खोज }: भाजपा सरकार पर सनातन परंपराओं, साधु-संतों और धार्मिक आस्थाओं पर हमला करने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को कांग्रेस नेताओं ने राजधानी भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर उपवास और धरना प्रदर्शन किया। धरना-उपवास का नेतृत्व पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने किया, जिसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन शामिल हुए।
कांग्रेस नेताओं ने जगतगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एवं उनके शिष्यों के कथित अपमान, साधु-संतों पर दमनात्मक कार्रवाई और काशी के मणिकर्णिका घाट जैसे पवित्र स्थलों को प्रभावित करने के प्रयासों को लेकर भाजपा सरकार की कड़ी आलोचना की।
इस दौरान पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि हजारों वर्षों से सनातन परंपराओं में जगतगुरु शंकराचार्य की मान्यता स्वतः सिद्ध रही है, लेकिन आज उनसे प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में शंकराचार्य को गंगा स्नान से रोका गया, जो सनातन परंपराओं के मूल स्वरूप के विरुद्ध है। पटवारी ने कहा कि भारत के इतिहास में कभी किसी ने शंकराचार्य को गंगा स्नान से रोकने का दुस्साहस नहीं किया, लेकिन हिंदू हितों की बात करने वाली भाजपा सरकार ने ऐसा किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस सनातन परंपरा में विविधता ही सबसे बड़ी शक्ति रही है, उसी परंपरा में शंकराचार्य को गंगा स्नान से क्यों रोका गया।
पीसीसी चीफ पटवारी ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी राजनीतिक विचारधारा का नहीं, बल्कि भारत की आस्था, अस्मिता और सम्मान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने साधु-संतों और बटुकों के साथ कथित दुर्व्यवहार का जिक्र करते हुए कहा कि सामने आए दृश्य अत्यंत पीड़ादायक हैं और सनातन संस्कृति को आहत करने वाले हैं। पटवारी ने कहा कि सत्ता में रहते हुए भले ही दोषियों को तत्काल सजा न मिले, लेकिन उन्हें अपने कर्मों का परिणाम अवश्य भुगतना पड़ेगा। उन्होंने सभी सनातन मानने वालों और देशवासियों से इस विषय को गंभीरता से समझने की अपील की।
धरना-प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर धर्म का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग करने का आरोप लगाया और कहा कि जनता ऐसे कृत्यों का सच जल्द ही समझेगी। कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण को भारत की धार्मिक परंपराओं और सम्मान पर आघात बताते हुए केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की निंदा की।
