पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का इतना सम्मान तो होना ही चाहिए

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सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }:
कई महीनों ने देश के राजनीतिक दल यह सवाल पूछ रहे थे कि भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा, वह कब चुना जाएगा, समय लग रहा था तो मजाक भी उड़़ाया जा रहा था कि भाजपा अपना अध्यक्ष नहीं चुन पा रही हैं,तरह तरह की बातें की जा रही थी कि संघ व भाजपा के बीच अध्यक्ष को लेकर मतभेद हैं,इसलिए वह अपना अध्यक्ष नहीं चुन पा रही है। भाजपा के कई नेताओं के नाम की चर्चा थी लेकिन कोई नहीं जानता था कि भाजपा का नया अध्यक्ष कौन होगा। बिहार चुनाव के बाद जब बिहार के नितिन नवीन को भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया तो भी कोई यह मानने को तैयार नहींं था कि उनको राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाएगा। आज जब उनको राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया है तो यह साफ हो गया है कि अब नितिन नवीन ही राष्टीय अध्यक्ष के रूप में काम करेंगे।
आज नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा की प्रक्रिया के अऩुसार चुन लिया गया है तो फिर एक बार यह बात साबित हुई है कि भाजपा में पीएम हो या राष्ट्रीय अध्यक्ष या किसी राज्य की सीएम एक कार्यकर्ता बन सकता है और पीएम,सीएम व राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद भी वह पार्टी का कार्यकर्ता बना रहता है। भाजपा में कार्यकर्ता का यही सबसे बड़ा सम्मान है कि उसका बड़ा महत्व है, उसका बड़ा सम्मान है। देश के पीएम भी उनका सम्मान करते हैं और सीएम भी उनका सम्मान करते हैं। पीएम मोदी ने आज नितिन नवीन को अध्यक्ष बनने के बाद बधाई दी और जब यह कहा कि नितिन नवीन अब मेरे भी बॉस है तो भाजपा के अध्यक्ष के लिए सबसे बड़ा सम्मान था। भाजपा के हर कार्यकर्ता का बड़ा सम्मान था। सब के मन में यही बात थी कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का इतना सम्मान तो होना चाहिए।
देश में बहुत सारे राजनीतिक दल हैं और हर पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी है। याद नहीं आता है कि किसी राजनीतिक दल के सबसे बड़े नेता,सीएम या पीएम ने कभी पार्टी के राष्टीय अध्यक्ष का सम्मान करते हुए कहा हो कि पार्टी का अध्यक्ष आज से मेरा भी बॉस है।पीएम मोदी ने ऐसा कहा है और पीएम मोदी ही ऐसा कह सकते है क्योंकि वह खुद कार्यकर्ता से देश के पीएम बने हैं और साफ कहते हैं कि पीएम होने के बाद भी मैं पार्टी का एक कार्यकर्ता हू। सभी दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऐसा चाहते हैं लेकिन उनको ऐसा सम्मान नहीं मिलता है क्योंकि वह परिवार की पार्टी के अध्यक्ष होते हैं और पार्टी जिस परिवार की होती है, वह सबसे बड़ा होता है, पार्टी के अध्यक्ष से बड़ा होता है और पार्टी अध्यक्ष को यह एहसास दिलाता रहता है कि बड़ा अध्यक्ष नहीं है, बड़ा परिवार है।
कांग्रेस नेता कह सकते हैं कि भाजपा में चुनाव प्रक्रिया सिर्फ मजाक है। सब कुछ पहले से तय होता है यहां सीधे मनोनयन होता है।भाजपा लोकतंत्र की बात करती है लेकिन लोकतंत्र तो कांग्रेस में है।कांग्रेस में विधिवत चुनाव के जरिए मल्लिकार्जुन खरगे अध्यक्ष चुने गए।भाजपा में वोटिंग से अध्यक्ष नहीं बनते,वहां संगठनात्मक फैसले भी ऊपर से थोपे जाते हैं।कांग्रेस नेता ऐसा कहते हुए भूल जाते हैं कि उनका चुना हुआ अध्यक्ष कहता है वह कोई फैसला नहीं कर सकते, इसका फैसला तो आलाकमान करेगा।यानी कांग्रेस मे अध्यक्ष से भी बडा़ कोई होता है,यह अध्यक्ष खुद कहते हैं। देश ने आज तक नहीं सुना कि राहुल गांधी ने कहा हो कि कांग्रेस अध्यक्ष खरगे मेरे ब़ॉस हैं।
कांग्रेस नेता भले ही नितिन नवीन को कमजोर अध्यक्ष समझें लेकिन नितिन नवीन ने संगठन में काम किया है और जो काम सौंपा गया है, वह पूरा करने मे सफल रहे हैं। यानी नितिन नवीन पार्टी के आजमाए हुए नेता है और पार्टी को उन पर भरोसा है कि वह पार्टी को मजबूत करेंगे,एनडीए को मजबूत करेंगे, पार्टी को अगले चुनाव जिताएंगे, उनका काम विकसित भारत के लिए काम करना है, क्योंकि विकसित भारत भाजपा व मोदी सरकार का लक्ष्य है।कांग्रेस के चुने हुए अध्यक्ष खरगे को अध्यक्ष बने कई साल हो गए और उनको आज तक पता नही है कि उनको पार्टी को मजबूत करने के लिए क्या करना है, गठबंधन को मजबूत करने के लिए क्या करना है। मालूम होता तो कहते और करते दिखते।

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