क्या सुप्रीम कोर्ट बंगाल की मुख्यमंत्री और डीजीपी को ठहराएगा जिम्मेदार : भाजपा

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कोलकाता{ गहरी खोज } : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्वाचन आयोग को पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने और नागरिकों को अनावश्यक परेशानी से बचाने के निर्देश दिए जाने के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर तीखा सवाल उठाया है। भाजपा ने पूछा है कि क्या शीर्ष अदालत राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार को राज्य में लगातार खराब होती कानून-व्यवस्था के लिए जवाबदेह ठहराएगी। भाजपा की आईटी सेल के प्रमुख और पश्चिम बंगाल के लिए पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक अमित मालवीय ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि सोमवार को भी सुप्रीम कोर्ट को एक बार फिर पश्चिम बंगाल के डीजीपी को राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश देना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह ऐसा निर्देश है, जिसे अदालत को बार-बार दोहराना पड़ रहा है।
मालवीय के अनुसार, जब सुप्रीम कोर्ट का आदेश लिखा जा रहा था, उसी समय पश्चिम बंगाल में हिंसा की घटनाएं सामने आ रही थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शीर्ष अदालत राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर संज्ञान लेगी।
अपने बयान में, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किया, मालवीय ने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न जिलों में पुलिस की मौन सहमति से व्यापक और संगठित हिंसा हुई है। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को फॉर्म-7 स्वीकार न करने देने के लिए उत्पात मचाया, जबकि पुलिस या तो मूक दर्शक बनी रही या कई मामलों में सक्रिय रूप से सहयोग करती दिखी।
भाजपा नेता ने विशेष रूप से अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां कई दिनों से हालात अराजक बने हुए हैं और किसी प्रकार की राहत के संकेत नहीं हैं। उन्होंने इसे महज छिटपुट घटनाएं नहीं, बल्कि राज्यव्यापी, सुनियोजित और दस्तावेज़ों में दर्ज स्थिति बताया। मालवीय ने कहा कि यह संवैधानिक शासन के पतन का स्पष्ट उदाहरण है। क्या सुप्रीम कोर्ट इस पर संज्ञान लेकर डीजीपी और ममता बनर्जी सरकार को जवाबदेह ठहराएगा? उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगालवासी एक ओर सत्तावादी शासन और दूसरी ओर न्यायिक उदासीनता के बीच पिस रही है। अपने बयान में मालवीय ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए तनाव और हिंसा की घटनाओं का जिला-वार विवरण भी प्रस्तुत किया है।

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