सांसद सुधांशु के आरोप

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-इरविन खन्ना
संपादकीय { गहरी खोज }:
भाजपा सांसद व पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डा. सुधांशु त्रिवेदी ने नेहरू की पुस्तक ‘डिस्कवरी आफ इंडिया’ सहित अन्य पुस्तकों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सोमनाथ और मथुरा के मंदिरों-भवनों का विध्वंस करने वाले महमूद गजनी को पंडित नेहरू ने कलाप्रेमी बताया था। उन्होंने कहा कि जो लोग देश में बैठकर मैकाले और मार्क्स के मानस पुत्र बनकर सोचते हैं, उनके दिमाग में 19वीं सदी का मैकाले फैक्टर और 20वीं सदी का मार्क्सिस्ट फैक्टर गहराई से बैठा हुआ है, वे इसका उत्तर भी समझ सकते हैं। इसका उत्तर भी एक ‘एम’ फैक्टर ही है और वह है मोदी फैक्टर। यह एम फैक्टर ही मैकाले की मानसिकता से मुक्ति दिलाएगा।
भाजपा प्रवक्ता ने गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर के विध्वंस की याद दिलाते हुए कहा कि इतिहास के ऐसे आघातों को स्मरण रखना आवश्यक है। इसका कारण यह है कि इस देश की अस्मिता के साथ एक अत्यंत घिनौना मजाक किया गया। हमारी पीढ़ी और उससे पहले की पीढ़ियों ने इतिहास की पुस्तकों में पढ़ा है कि महमूद गजनी ने सोमनाथ पर जो कुछ किया, वह केवल धन लूटने के लिए था और उसका कोई धार्मिक उद्देश्य नहीं था। सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि इसका स्रोत पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुस्तक ‘डिस्कवरी आफ इंडिया’ है। उसमें लिखा है कि महमूद गजनी एक योद्धा था, न कि आस्था से प्रेरित व्यक्ति और अन्य कई विजेताओं की तरह उसने धर्म के नाम का उपयोग अपने आक्रमणों के लिए किया। वह कोई धार्मिक उन्मादी नहीं था, बल्कि केवल धन कमाने के उद्देश्य से भारत आया था। उसी पुस्तक में यह भी लिखा गया है कि वह कला का कितना बड़ा प्रेमी था, जबकि गजनी के साथ ही आए उसके अपने इतिहासकार कुतबी ने अपने किताब ‘तारीख-ए-यामिनी’ में स्पष्ट रूप से लिखा है कि जिस समय महमूद गजनी ने मंदिर पर अधिकार कर लिया, तब वहां के समय पुरोहित और राजा उसके पास गए और प्रार्थना की कि शिवलिंग को खंडित न किया जाए। इसके बदले में वे उसे लाखों स्वर्ण मुद्राएं देने को तैयार हैं। उसके सलाहकार राजी थे, लेकिन गजनी ने इस प्रस्ताव को यह कहकर ठुकरा दिया कि अपनी पहचान मूर्तियां तोड़ने वाले के रूप में बनाना चाहता है। 1951 को डा. राजेन्द्र प्रसाद ने कहा था कि सोमनाथ की पूर्ण प्रतिष्ठा उस दिन मानी जाएगी, जब भारत की समृद्धि का शिखर भी उसी प्रकार उठता हुआ दिखाई देगा, जिस समृद्धि से आकर्षित होकर अतीत में उस पर क्रूर और बर्बर आतंकी आक्रमण किए गए थे।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सांसद डा. सुधांशु त्रिवेदी ने जो आरोप लगाए हैं उनमें दम है। भारत के इतिहास को इस तरह लिखा गया है कि बहुमत हिन्दू समाज मनोविज्ञानिक रूप से दबाव में रहे और अपनी सनातन संस्कृति और इतिहास पर गर्व करने से संकोच करें। भाजपा जब से सत्ता में आई तब से सनातन संस्कृति और भारतीय इतिहास के गौरवमयी तथ्य सामने आने लगे हैं, साथ ही मुगल हमलावरों के अमानवीय कृत्य भी उजागर होने लगे हैं जिनको अतीत में सत्ताधारियों ने छुपाने का काम किया था।
इंसान के जीवन की तरह ही देश उतार चढ़ाव से गुजरता है भारत ने भी उतार चढ़ाव देखें लेकिन आज भारत अपने गौरवमय अतीत को ढूंढ कर भावी पीढ़ियों को सौंपने का प्रयास कर रहा है। सोमनाथ मंदिर को लेकर जो तथ्य प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों सम्मुख रखें यह एक प्रयास है अपने अतीत को सम्भाल कर भावी पीढ़ी को सौंपने का। डा. सुधांशु त्रिवेदी इतिहास लिखने में हुई भूल को ही सुधारने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे प्रयास जारी रहने चाहिए।

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