इन पेड़ों से बनी भगवान की मूर्ति पूजा में बन सकती है बाधा, देवी-देवताओं की प्रतिमा बनवाने से पहले जान लें शास्त्रों के नियम

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धर्म { गहरी खोज } :सनातन धर्म में देवी-देवताओं की मूर्तियां सिर्फ पूजा की वस्तु नहीं होतीं, बल्कि आस्था, नियम और परंपरा का प्रतीक मानी जाती हैं। मूर्ति निर्माण के दौरान सुंदरता से ज्यादा शुद्धता, शुभता और शास्त्रीय नियमों का ध्यान रखा जाता है। यही कारण है कि मूर्ति बनाने में इस्तेमाल होने वाली धातु, पत्थर या लकड़ी का चयन बेहद सोच-समझकर किया जाता है। शास्त्रों में कुछ लकड़ियों को पूजा के लिए अनुपयुक्त और अशुभ माना गया है, जिनका इस्तेमाल मूर्ति निर्माण में वर्जित बताया गया है। अगर आप भी मूर्ति बनवाने का सोच रह हैं, तो पहले जान लें शास्त्रों का नियम।

मूर्ति निर्माण में लकड़ी का महत्व

हिंदू धर्म में यह माना जाता है कि भगवान की मूर्ति में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इसलिए मूर्ति निर्माण के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री का सीधा असर पूजा और साधना पर पड़ता है। शास्त्रों में बताया गया है कि हर पेड़ की लकड़ी में समान ऊर्जा नहीं होती, इसी वजह से कुछ लकड़ियों को मूर्ति निर्माण के लिए वर्जित किया गया है।

किन लकड़ियों से मूर्ति नहीं बनाई जाती?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दूध देने वाले पेड़, पूरी तरह सूखे पेड़, कमजोर टहनियों वाले पेड़, श्मशान के पास उगने वाले पेड़ या जिन पेड़ों के नीचे चींटी और सांप का वास हो, ऐसे पेड़ों की लकड़ी को मूर्ति निर्माण के लिए अशुभ माना गया है।

बबूल की लकड़ी क्यों मानी जाती है वर्जित?

बबूल की लकड़ी मजबूत होने के बावजूद मूर्ति निर्माण में इस्तेमाल नहीं की जाती। धार्मिक मान्यता है कि बबूल तामसिक प्रवृत्ति का पेड़ है और इसकी लकड़ी से बनी मूर्ति सकारात्मक ऊर्जा प्रदान नहीं कर पाती।

नीम की लकड़ी से क्यों नहीं बनती मूर्ति?

नीम को औषधीय और पवित्र माना जाता है, लेकिन इसकी लकड़ी को मूर्ति निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं समझा गया है। मान्यता है कि नीम की लकड़ी कठोर होने के बावजूद मूर्ति के लिए शुभ नहीं होती।

पलाश या ढाक की लकड़ी का निषेध

पलाश के पत्ते और लकड़ी हवन-यज्ञ में उपयोग किए जाते हैं, लेकिन इसकी लकड़ी जल्दी टूटने वाली मानी जाती है। इसी कारण इसे मूर्ति निर्माण के लिए स्थायी और शुभ नहीं माना गया है।

आम की लकड़ी क्यों नहीं होती इस्तेमाल

आम के पत्ते पूजा-पाठ में शुभ माने जाते हैं, लेकिन आम की लकड़ी को मूर्ति निर्माण के लिए वर्जित बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह लकड़ी मूर्ति को दीर्घकालिक स्थिरता नहीं देती।

शमी और बेल की लकड़ी का धार्मिक पक्ष

शमी और बेल दोनों ही पूजनीय वृक्ष हैं। इनके पत्ते भगवान को अर्पित किए जाते हैं, लेकिन इनकी लकड़ी से मूर्ति नहीं बनाई जाती। मान्यता है कि इन पेड़ों की लकड़ी अन्य धार्मिक कार्यों के लिए ठीक है, मूर्ति निर्माण के लिए नहीं।

किन लकड़ियों से मूर्ति बनाना माना जाता है शुभ

शास्त्रों के अनुसार सागवान, चंदन और सफेद आक की लकड़ी को मूर्ति निर्माण के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। सागवान की लकड़ी मजबूत और टिकाऊ होती है, चंदन की लकड़ी पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक है, जबकि सफेद आक की लकड़ी को भी धार्मिक दृष्टि से श्रेष्ठ माना गया है।

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