असम में चुनाव जिताने की चुनौती प्रियंका गांधी को

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सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }:
कांग्रेस का एक धड़ा इस बात की शिकायत करता था कि गांधी परिवार की प्रियंका गांधी को पार्टी कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं देती है,उनका कोई उपयोग नहीं करती है।कांग्रेस महासचिव वेणुगोपाल ने हाल ही में असम, बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पडुचेरी के विधानसभा चुनाव के लिए स्क्रीनिंग कमेटी की घोषणा की है। इसमें से असम कमेटी की अध्यक्ष प्रियंका गांधी बनाई गई हैं। इसके अलावा कांग्रेस नेता मधुसूदन मिस्त्री को केरल समिति का अध्यक्ष,टीएस सिंहदेव को तमिलनाड़ु व पुडुचेरी की समिति का अध्यक्ष,हरिप्रसाद को बंगाल समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। देखने में तो यह रूटीन में लिया गया फैसला है। यानी चुनाव के पहले ऐसी समितियां हर बार बनाई जाती है, इसलिए इस बार बनाई गई हैं, पहले और इस बार बनाई गई समिति में यह फर्क है कि पहले कांग्रेस के पहली पंक्ति के नेताओं को ही चुनाव जिताने के लिए समिति का अध्यक्ष बनाया जाता था, इस बार गांधी परिवार की एक सदस्य प्रियंका गांधी को भी एक राज्य में चुनाव जिताने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ऐसा नहीं है कि गांधी परिवार की सदस्य प्रियंका गांधी को पहली बार किसी राज्य में चुनाव जिताने की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले भी उनको यूपी विधानसभा चुनाव मे आधे यूपी का प्रभारी बनाया गया था। तब उन्होंने यूपी में कांग्रेस का खूब प्रचार किया था, उनकी सभाओं में भीड़ बहुत आती थी,उन्होंने यूपी विधानसभा चुनाव में लड़की हूं लड़ सकती हूं का नारा भी दिया था।चुनाव के दौरान तो ऐसा माना जा रहा था कि यूपी में प्रियंका गांधी कांग्रेस को अच्छी सफलता दिला सकती हैं, इससे यूपी में प्रियंका कांग्रेस को मजबूत कर सकती हैं।प्रियंका गांधी को यूपी में कांग्रेस का मजबूत करने व चुनाव जिताने के लिए भेजा गया था लेकिन उनके नेतृत्व में कांग्रेस बुरी तरह हारी, मात्र दो सीट ही कांग्रेस जीत सकी थी और चार प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे थे यानी अकेले चुनाव लड़ने पर कांग्रेस को बुरी हार का सामना करना पड़ा था और प्रियंका गांधी की शुरुआत ही बुरी रही थी।
इसके बाद से कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हो चुके, लोकसभा चुनाव भी २४ में हुआ लेकिन प्रियंका गांधी को कहीं भी चुनाव जिताने की जिम्मेदारी नहीं दी गई। यानी मान लिया गया कि वह कांग्रेस को चुनाव नहीं जिता सकती है।पिछले साल हरियाणा,दिल्ली,महाराष्ट्र.झारखंड,बिहार,जम्मूकश्मीर में विधानसभा चुनाव हुए और कांग्रेस ने हरियाणा,दिल्ली व महाराष्ट, में अकेले चुनाव लड़ा और बुरी तरह हारी।मिल के चुनाव लड़ा तो जम्मू कश्मीर,झारखंड में जीती लेकिन बिहार में हारी। इससे कांग्रेस में भारी असंतोष पैदा हुआ है कि गांधी परिवार अब चुनाव जीता नहीं पा रहा है। इससे राहुल गांधी की क्षमता पर सवालिया निशान लग गया है। पार्टी में असंतोष बढ़ रहा है। राहुल गांधी को हार से बचाने के लिए कांग्रेस की तरफ से कहा तो गया कि वोट चोरी के कारण कांग्रेस हार रही है यानी चुनावी हार के लिए राहुल गांधी दोषी नहीं है,चुनाव आयोग व मोदी सरकार दोषी है।
ऐसे में कांग्रेस के भीतर से ही यह मांग उठने लगी की राहुल गांधी को बहुत मौका दिया गया है वह बीस साल में कांग्रेस कम चुनाव जिताएं और ज्यादातर चुनाव जीता नहीं पाए हैं। वह नेता प्रतिपक्ष बनाए गए हैं लेकिन विपक्ष को एकजुट नहीं कर पाए है। बिहार चुनाव हारने के बाद तो उनकी नेतृत्व क्षमता पर भी सवालिया निशान लग गया है क्योंकि यहां सरकार के खिलाफ २० साल की नाराजगी थी लेकिन राहुल गांधी वोट चोरी के मुद्दे को उठाकर इस मौके का गवां दिया और इसका नुकसान तेजस्वी यादव को भी हुआ है। राहुल गांधी की असफलता के कारण ही कांग्रेस में प्रियंका समर्थकों को मौका मिला यह मांग करने का कि अब प्रियंका गांधी को भी पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। हाल ही में संसद में मौका मिला तो प्रियंका ने सभी को प्रभावित किया। लोकसभा अध्यक्ष की चाय पार्टी में जाकर भी उन्होंने यह जाहिर करने का प्रयास किया कि वह राहुल गांधी से अलग तरह की नेता है। उनके इस कदम की भी लोगों ने तारीफ की है।
यह कांग्रेस के भीतरी दबाव का परिणाम है कि जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं,उनमें एक राज्य असम में चुनाव जिताने की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी को दी गई है। असम में कांग्रेस २०१६ सत्ता से बाहर है। वह अकेले लड़ी और दो बार चुनाव हार चुकी है। वर्तमान में वहां हेमंता सरमा सीएम हैं और वह कभी असम में कांग्रेस के बड़े नेता हुआ करते थे। वह राहुल गांधी के खिलाफ बड़ी तीखा तीखा बोलते हैं,उनको हराने की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी को सौपकर राहुल समर्थकों ने एक तीर से दो शिकार किए हैं।अगर प्रियंका गांधी हरा देती है तो इससे असम में कांग्रेस काे फायदा होगा।अगर नही हरा पाती है तो प्रियंका गांधी का राजनीतिक कद छोटा हो जाएगा कि वह किसी राज्य में कांग्रेस काे चुनाव नहीं जीता पाती हैं।यानी राहुल गांधी को जो चुनौती प्रियंका गांधी के समर्थक दे रहे हैं वह कुछ समय के लिए बंद हो जाएगी। राहुल गांधी के समर्थकों को कहने का मिलेगा कि उनको मौका दिया था लेकिन वह सफल नहीं हो पाई।

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