पिछले 22 वर्षों से गुजरात के नागरिकों का सरकार में विश्वास दृढ़ कर रहा प्लेटफॉर्म

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गांधीनगर { गहरी खोज }: नागरिकों तथा Government के बीच की दूरी को समाप्त करने के लिए टेक्नोलॉजी में विद्यमान क्षमता का अधिकतम उपयोग कर राज्य के तत्कालीन Chief Minister Narendra Modi ने 24 अप्रैल, 2003 को ‘स्टेट वाइड अटेंशन ऑन ग्रिवेंसेज बाई एप्लिकेशन ऑफ टेक्नोलॉजी’ (स्वागत) कार्यक्रम की शुरुआत की थी।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरल, परंतु सशक्त था कि नागरिक भय, विलंब और प्रक्रियागत अवरोधों के बिना Government के उच्चतम स्तरों के समक्ष अपनी शिकायतें सीधे ही प्रस्तुत कर सकें। ‘स्वागत’ ऑनलाइन जन शिकायत निवारण कार्यक्रम का दायरा जिला, तहसील एवं ग्रामीण स्तर तक विस्तृत हुआ है। इस पहल को आज Chief Minister भूपेंद्र पटेल प्रभावशाली ढंग से संचालित कर रहे हैं। वर्ष 2003 से लेकर आज 22 वर्षों से ‘स्वागत’ प्लेटफॉर्म Gujarat के नागरिकों का राज्य Government में विश्वास दृढ़ कर रहा है। इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि पिछले 22 वर्षों में इस प्लेटफॉर्म पर प्राप्त हुए 99.10 प्रतिशत आवेदनों का सकारात्मक निपटान किया गया है।
‘स्वागत’ को एक सक्रिय एवं लोक केंद्रित प्लेटफॉर्म के रूप में डिजाइन किया गया था। अब Chief Minister भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में समय तथा टेक्नोलॉजी के साथ ‘स्वागत’ प्लेटफॉर्म का विकास किया गया है। Chief Minister के मार्गदर्शन में 25 दिसंबर, 2024 को राज्य के सभी जिलों एवं सभी विभागों में ‘स्वागत 2.0’ ऑटो एस्केलेशन मैट्रिक्स पद्धति लागू की गई है और साथ ही ‘स्वागत’ ऑनलाइन मोबाइल एप्लिकेशन भी शुरू की गई है।
ऑटो एस्केलेशन मैट्रिक्स पद्धति 25 दिसंबर, 2023 को ‘सुशासन दिवस’ के उपलक्ष्य में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में राजस्व एवं पंचायत विभाग तथा पाटण व खेडा जिलों में लागू की गई थी। पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च करने के बाद कुल 21,540 आवेदनों में से 90 प्रतिशत आवेदनों का समयसीमा में सकारात्मक समाधान किया गया। पायलट प्रोजेक्ट के सफल रहने के बाद सुशासन दिवस, 25 दिसंबर, 2024, को ‘स्वागत 2.0’ सभी जिलों में लॉन्च किया गया।
आधुनिक ‘स्वागत’ सिस्टम की संरचना एक ऑटोमैटिक एस्केलेशन फ्रेमवर्क के आसपास की गई है, जो सुनिश्चित करता है कि शिकायतें किसी भी स्तर पर अवरुद्ध न हो जाएं। ‘स्वागत 2.0’ में नागरिकों की समस्याओं का निश्चित समयसीमा में गुणात्मक निवारण लाने के लिए निपटान की समयसीमा निर्धारित की गई है। आवेदक की प्रस्तुति या शिकायत अधिकारी को ऑनलाइन माध्यम से भेजी जाती है, जिसकी निवारण की सीधी जिम्मेदारी है। आवेदक की प्रस्तुति के प्रति संबद्ध अधिकारी को निर्धारित समयसीमा में आवश्यक कार्यवाही करनी होती है। आवेदकों को भी पंजीकरण से लेकर अंतिम निवारण तक के प्रत्येक चरण की जानकारी एसएमएस से दी जाती है।
यदि निर्धारित समयसीमा में शिकायत का निवारण न किया जाए, तो वह शिकायत समयसीमा पूर्ण होने के बाद ऑटोमैटिक उसके एक लेवल ऊपर के अधिकारी के लॉगिन में ऑटो एस्केलेट होती है। इसके बाद उस उच्च अधिकारी को शिकायत का निवारण करना होता है। उच्चाधिकारी द्वारा शिकायत निवारण करना अनिवार्य है। प्रस्तुति का संतोषजनक तथा उचित ढंग से निवारण होने संबंधी वेरिफिकेशन होने के बाद ही प्रस्तुति का अंतिम निपटान माना जाता है। इसके अतिरिक्त आवेदक अपनी शिकायत को लेकर हुई कार्यवाही से संतुष्ट न हों, तो वे फीडबैक देकर शिकायत को एक लेवल ऊपर के अधिकारी को एस्केलेट भी कर सकते हैं।
Chief Minister कार्यालय (सीएमओ) द्वारा भी इन आवेदनों की सघन निगरानी की जाती है। पोर्टल में प्राप्त आवेदनों का समय पर निवारण लाने के उम्दा उद्देश्य से विभिन्न मॉनिटरिंग डैशबोर्ड तैयार किए गए हैं। इसके अलावा, अधिकारियों के परफॉर्मेंस के परीक्षण के लिए परफॉर्मेंस डैशबोर्ड भी तैयार किया गया है, जिसके आधार पर यह जानकारी मिलती है कि किस जिले में किस प्रकार की शिकायतें अधिक संख्या में आती हैं और राज्य के विभिन्न जिलों से मिलने वाली शिकायतों के अनुसार किस तरह के नीतिगत परिवर्तनों की जरूरत है।
‘स्वागत’ कार्यक्रम के माध्यम से कई नीतिगत निर्णय किए गए हैं, जिनमें मुख्यतः किसानोन्मुखी, भूमि अधिग्रहण, विद्यार्थी-उन्मुखी, गोचर भूमि अतिक्रमण, री-सर्वे, Police से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं।
पोरबंदर जिले की कुतियाणा तहसील के मोडदर गांव में ‘स्वागत’ कार्यक्रम के माध्यम से किसानों की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हुआ। मोडदर गांव से पसवारी के बीच सुखभादर नदी पर पुल नहीं होने के कारण किसानों को पिछले 40 वर्षों से अपने खेत में 15 किलोमीटर घूमकर पहुंचना पड़ता था।
इस संबंध में आवेदक लखमणभाई नवघणभाई मोडेदरा ने तहसील एवं जिला स्तर पर शिकायत की और इसके बाद उनकी समस्या राज्य स्तरीय ‘स्वागत’ कार्यक्रम तक पहुंची। आवेदक ने पुल न होने के कारण 118 किसानों को 3,600 बीघा भूमि की खेती के रोजमर्रा के कार्य में पड़ने वाली कठिनाइयां प्रस्तुत की थीं। उनकी प्रस्तुति सुनने के बाद Chief Minister ने पुल तथा सड़क के कार्य तत्काल पूर्ण करने के लिए सड़क एवं भवन सचिव तथा पोरबंदल जिला कलेक्टर को निर्देश दिए, जिसके परिणामस्वरूप मोडदर-पसवारी के बीच 9 करोड़ रुपए की लागत से माइनर ब्रिज, क्लवर्ट और तीन किलोमीटर सड़क निर्माण किया जाएगा।
‘स्वागत’ ऑनलाइन जन शिकायत निवारण कार्यक्रम को समझने के लिए India Government के सचिव, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, त्रिपुरा, Madhya Pradesh, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश आदि जैसे विभिन्न राज्यों के Chief Minister कार्यालयों के प्रतिनिधिमंडलों द्वारा ‘स्वागत’ इकाई की जानकारी ली गई है। उन्होंने अपने राज्य में भी इस प्रकार की सुविधा लागू करने के बारे में जानकारी हासिल की।

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