लाल किला विस्फोट: मुआवज़े की राह देख रहे पीड़ितों का कुछ नही मिला

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: नवंबर महीने में लाल क़िला मेट्रो स्टेशन के पास हुए विस्फोट से प्रभावित हुए कई पीड़ितों और उनके परिवारों को हादसे के एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, दिल्ली सरकार द्वारा घोषित किया गया मुआवज़ा अभी तक नहीं मिला है।
दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने धमाके में जान गंवाने वालों के परिवारों को 10 लाख रुपये, स्थायी रूप से विकलांग हुए पीड़ितों को 5 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायल लोगों को 2 लाख रुपये और मामूली रूप से घायल लोगों को 20,000 रुपये मुआवज़ा देने की घोषणा की थी। मृतकों में से कई अपने परिवारों के एक मात्र कमाने वाले सदस्य थे. मुआवज़े में हो रही देरी ने उनके परिवारों को गंभीर संकट में डाल दिया है. 18 वर्षीय नौमान अंसारी भी ऐसे ही एक पीड़ित थे, जो धमाके के दिन उत्तर प्रदेश के शामली में स्थित अपनी दुकान के लिए सामान ख़रीदने दिल्ली आए थे।
नौमान के चाचा महबूब अंसारी ने मीडिया से कहा, ‘उसकी मौत के बाद से पूरा परिवार अवसाद में चला गया है. दिल्ली में उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) के पास सभी दस्तावेज़ जमा करने के बाद हमें इंतज़ार करने को कहा गया. एक हफ्ते बाद बताया गया कि एसडीएम का तबादला होने वाला है और उसके बाद सारी औपचारिकताएं पूरी होंगी. फिर कहा गया कि उत्तर प्रदेश सरकार और यहां की स्थानीय पुलिस से समन्वय किया जा रहा है। लेकिन तमाम काग़ज़ी कार्रवाई पूरी होने के बाद भी हमें अब तक कुछ नहीं मिला है।
इसी तरह विस्फोट में मारे गए 50 वर्षीय पुजारी विनय पाठक के बेटे अनीद पाठक ने बताया कि पिता की मौत ने उनकी मां को गहरे सदमे में डाल दिया है. उन्होंने कहा, ‘पिता को खोने का दर्द शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता. उनकी मौत के बाद से मेरी मां की मानसिक स्थिति बेहद खराब है. परिवार इस दुख से उबर नहीं पा रहा है.’ अनीद ने बताया कि सभी ज़रूरी दस्तावेज़ पूरे करने और समय पर मुआवज़ा मिलने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद उनके परिवार को अब तक कोई राशि नहीं मिली है. मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने इस मामले से जुड़े अख़बार के सवालों का जवाब नहीं दिया. लेकिन द हिंदू के अनुसार सीएमओ के एक सूत्र ने बताया कि अब तक 11 पीड़ितों को मुआवज़ा दिया जा चुका है, जबकि बाकी मामलों में पुलिस से मंज़ूरी का इंतज़ार है। सूत्र के हवाले से कहा गया, ‘बाकी आवेदकों को लेकर हमें अभी दिल्ली पुलिस से स्पष्टता नहीं मिली है. पुलिस ने अब तक यह साफ़ नहीं किया है कि वे वास्तव में पीड़ित हैं या उनका किसी आरोपी के साथ कोई संबंध है.

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