VB-G राम जी एक्ट के खिलाफ प्रस्ताव पर शिवराज का पंजाब सरकार पर हमला:शिवराज
भोपाल{ गहरी खोज }: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को पंजाब विधानसभा में VB-G राम जी अधिनियम के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव को अलोकतांत्रिक और संविधान की मूल भावना के विरुद्ध करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कदम “अंधे विरोध” की राजनीति को दर्शाता है और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों का पालन करना राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
यहां एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार द्वारा विधानसभा में ऐसा प्रस्ताव लाना न केवल लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है, बल्कि संवैधानिक ढांचे को भी कमजोर करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद से पारित किसी कानून के विरुद्ध राज्य विधानसभा में प्रस्ताव लाना संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है।
मंगलवार को पंजाब विधानसभा के एक दिवसीय सत्र के दौरान राज्य के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध ने VB-G राम जी अधिनियम के खिलाफ प्रस्ताव चर्चा के लिए पेश किया। प्रस्ताव में भाजपा-नीत केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म करने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए चौहान ने कहा कि वे “कल्पनाओं की दुनिया में रहते हैं” और देश की जमीनी हकीकत से कटे हुए हैं। उन्होंने राहुल गांधी के उस हालिया बयान का जिक्र किया, जिसमें दावा किया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना मंत्रिमंडल से चर्चा किए और बिना अध्ययन के मनरेगा को खत्म कर दिया। चौहान ने कहा कि जिम्मेदार राजनीति में बिना तथ्यों के बयानबाजी की कोई जगह नहीं है।
नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव को लेकर चौहान ने कहा कि कुछ लोग केवल विरोध के लिए विरोध करते हैं, उन्हें न तो लोकतंत्र की परवाह है और न ही संवैधानिक शिष्टाचार की। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर संसद के कानूनों के खिलाफ राज्य विधानसभा प्रस्ताव पारित करने लगे, तो क्या आगे चलकर जिला, जनपद या ग्राम पंचायतें भी राज्य कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने लगेंगी?
केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री ने दोहराया कि संसद द्वारा पारित कानूनों का पालन करना केंद्र और राज्यों—दोनों का संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार और विधानसभा में कुछ दलों का यह कदम न केवल अनुचित है, बल्कि संविधान की बुनियादी भावना के भी खिलाफ है।
एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए चौहान ने आरोप लगाया कि पंजाब में मनरेगा सहित कई योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सामने आया है, लेकिन दोषियों के खिलाफ न तो कार्रवाई की गई और न ही गबन की गई राशि की वसूली हुई। उन्होंने बताया कि राज्य की 13,304 ग्राम पंचायतों में से केवल 5,915 में ही सामाजिक अंकेक्षण कराया गया।
उनके अनुसार, रिपोर्ट में लगभग 10,653 वित्तीय अनियमितताओं के मामलों का उल्लेख है, लेकिन किसी भी मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मनरेगा के तहत उन कार्यों पर खर्च किया गया, जिनकी अनुमति नहीं थी, और कई मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिल रही है।
चौहान ने कहा, “एक तरफ भ्रष्टाचार रोकने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं हो रहा, और दूसरी तरफ संसद के कानूनों के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाए जा रहे हैं। यह सोच पूरी तरह अलोकतांत्रिक है, जिसकी मैं कड़ी निंदा करता हूं।”
वहीं, प्रस्ताव पेश करने के बाद मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध ने कहा कि VB-G राम जी अधिनियम से गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों, अनुसूचित जाति समुदायों और मनरेगा पर निर्भर ग्रामीण मजदूरों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
