दिल्ली HC ने केंद्र से पूछा: एयर प्यूरीफायर पर GST कम क्यों नहीं की जा सकती
नई दिल्ली { गहरी खोज }: दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से सवाल किया कि राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के इलाकों में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए आम आदमी के लिए एयर प्यूरीफायर को किफायती बनाने के उद्देश्य से उस पर लगने वाली वस्तु एवं सेवा कर (GST) क्यों नहीं घटाई जा सकती।
यह टिप्पणी उस समय आई जब केंद्र की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि GST काउंसिल एक संवैधानिक निकाय है और यह अब केवल दिल्ली का एकतरफा कर नहीं रहा। यह पूरे देश में लागू एक संघीय कर है, जिसमें सभी 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सहमति जरूरी होती है और केंद्रीय वित्त मंत्री भी इसके सदस्य होते हैं।
केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमण ने कहा कि GST काउंसिल में मतदान शारीरिक रूप से किया जाता है और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए यह संभव नहीं है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि सरकार इस मामले में एक विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करेगी। न्यायमूर्ति विकास महाजन और न्यायमूर्ति विनोद कुमार की अवकाश पीठ ने केंद्र सरकार को याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया और मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी को तय की।
पीठ ने कहा कि अदालत की चिंता यह है कि दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों की स्थिति को देखते हुए एयर प्यूरीफायर पर GST 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत क्यों नहीं की जा सकती। अदालत ने टिप्पणी की, “आप जिस भी तरीके से चाहें, समाधान निकालिए। एयर प्यूरीफायर की कीमतें 10–12 हजार रुपये से शुरू होकर 60 हजार रुपये तक जाती हैं, जो आम आदमी की पहुंच से बाहर हैं। इन्हें एक उचित स्तर पर क्यों नहीं लाया जा सकता, ताकि आम लोग भी इन्हें खरीद सकें।”
अदालत एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई थी कि एयर प्यूरीफायर को ‘मेडिकल डिवाइस’ की श्रेणी में रखा जाए और उस पर GST को पांच प्रतिशत किया जाए। वर्तमान में एयर प्यूरीफायर पर 18 प्रतिशत GST लगती है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता कपिल मदान ने दलील दी कि दिल्ली में गंभीर वायु प्रदूषण से उत्पन्न “आपातकालीन स्थिति” को देखते हुए एयर प्यूरीफायर को लग्ज़री वस्तु नहीं माना जा सकता।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि पिछली सुनवाई में भी अदालत याचिकाकर्ता के साथ थी, क्योंकि यह ऐसा मुद्दा है जिससे “हर कोई प्रभावित है।” इस पर सहमति जताते हुए ASG ने कहा, “निश्चित रूप से, माय लॉर्ड्स, हमारे दिल भी इसी मुद्दे के साथ हैं।”
उन्होंने बताया कि इस विषय पर वित्त मंत्री समेत शीर्ष स्तर पर चर्चा हुई है और गुरुवार को एक आपात बैठक भी हुई, लेकिन इस याचिका को लेकर सरकार की कुछ संवैधानिक चिंताएं हैं। ASG ने यह भी कहा कि यदि याचिकाकर्ता चाहे तो अदालत इस याचिका को GST काउंसिल के समक्ष एक अभ्यावेदन के रूप में भेज सकती है।
हालांकि, यदि याचिका पर विवाद जारी रखना है तो केंद्र सरकार एक विस्तृत जवाब दाखिल करना चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि याचिका “लोडेड” है और सरकार यह जानना चाहती है कि इसके पीछे कौन है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं कोई एयर प्यूरीफायर में एकाधिकार स्थापित करने की कोशिश तो नहीं कर रहा।
ASG ने यह भी तर्क दिया कि याचिका में कुछ प्रार्थनाओं का GST से सीधा संबंध नहीं है और स्वास्थ्य मंत्रालय को भी पक्षकार नहीं बनाया गया है। उन्होंने कहा कि 12 दिसंबर 2025 को ही संसदीय स्थायी समिति ने GST से जुड़े इस मुद्दे पर विचार करने की सिफारिश की है और यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसे दरकिनार नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता मदान ने जवाब में कहा कि संभव है कि केंद्र के वकील ने वह अधिसूचना नहीं देखी हो, जिसके तहत GST स्लैब तय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अधिसूचना के साधारण पाठ से ही यह स्पष्ट हो जाता है कि एयर प्यूरीफायर को गलत स्लैब में रखा गया है।
इस पर पीठ ने कहा कि बिना केंद्र का जवाबी हलफनामा देखे अदालत यह नहीं कह सकती कि GST गलत स्लैब में लगाया जा रहा है। अदालत ने कहा कि यह मुद्दा गहन विचार-विमर्श का है और इसे रोस्टर बेंच के समक्ष रखा जाना चाहिए।
मदान ने संबंधित अधिसूचना पढ़ते हुए कहा कि इसमें “श्वसन उपकरणों” का उल्लेख है और सभी मेडिकल डिवाइस अनुसूची-1 में आते हैं। अदालत ने ASG से पूछा कि GST काउंसिल की बैठक कराने में क्या कठिनाई है, ताकि इस पर फैसला लिया जा सके।
ASG ने जवाब दिया कि ऐसा करने से “पेंडोरा बॉक्स” खुल सकता है। उन्होंने कहा कि समिति ने सरकार को सिफारिशें दी हैं और वही निर्धारित प्रक्रिया है। उन्होंने कोई आश्वासन नहीं दिया कि GST घटाई जाएगी या नहीं, लेकिन अनुरोध किया कि याचिका को अभ्यावेदन के रूप में GST काउंसिल को भेजा जाए। 24 दिसंबर को अदालत ने GST काउंसिल को निर्देश दिया था कि वह जल्द से जल्द बैठक कर एयर प्यूरीफायर पर GST कम करने या खत्म करने पर विचार करे। इससे पहले भी उच्च न्यायालय ने इस “आपात स्थिति” में एयर प्यूरीफायर पर टैक्स में छूट न देने को लेकर नाराज़गी जताई थी, जब AQI ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है।
