बीएमसी चुनाव से पहले शिवसेना और मनसे का गठबंधन, उद्धव–राज ठाकरे साथ आए

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मुंबई{ गहरी खोज }: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। महीनों से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने गठबंधन की औपचारिक घोषणा कर दी है। बुधवार को शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह ऐलान किया। संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में उद्धव ठाकरे ने कहा कि दोनों दल साथ रहने और साथ लड़ने के लिए एकजुट हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गठबंधन ‘मराठी मानुष’ और महाराष्ट्र के हितों की रक्षा के लिए किया गया है। राज ठाकरे ने भी इस बात पर जोर दिया कि मुंबई और महाराष्ट्र के मुद्दों पर दोनों पार्टियां एकजुट होकर काम करेंगी।
राज ठाकरे ने बीएमसी चुनाव को लेकर सीट बंटवारे का विस्तृत खाका फिलहाल साझा नहीं किया, लेकिन उन्होंने इतना जरूर कहा कि “मुंबई का महापौर मराठी होगा और वह हमारा होगा।” वहीं उद्धव ठाकरे ने बताया कि नासिक नगर निगम चुनाव के लिए दोनों दलों के बीच सीटों का बंटवारा तय हो चुका है। इसके अलावा मुंबई और राज्य के 27 अन्य नगर निगमों के चुनाव को लेकर बातचीत जारी है।
उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा में जो कुछ हो रहा है, उसे सहन न कर पाने वाले लोग उनके साथ आ सकते हैं। हालांकि करीब 16 मिनट तक चली प्रेस कॉन्फ्रेंस में 227 वार्ड वाली बीएमसी के लिए सीट बंटवारे को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई, जिससे कयास लगाए जा रहे हैं कि कुछ वार्डों पर अभी भी सहमति बननी बाकी है।
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस वर्ली के एक होटल में आयोजित की गई, जो शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे का विधानसभा क्षेत्र है। मंच की पृष्ठभूमि में शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की तस्वीर के साथ दोनों पार्टियों के चुनाव चिह्न लगाए गए थे। इससे पहले उद्धव और राज ठाकरे ने शिवाजी पार्क में बाल ठाकरे की समाधि पर श्रद्धांजलि दी और इसके बाद एक ही वाहन से कार्यक्रम स्थल पहुंचे।
कार्यक्रम के दौरान पारिवारिक सौहार्द भी देखने को मिला। इस मौके पर उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि और पुत्र आदित्य, वहीं राज ठाकरे की पत्नी शर्मिला और पुत्र अमित भी मौजूद रहे। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में शिवसेना (उबाठा) को 288 में से 20 सीटें मिली थीं, जबकि मनसे को कोई सीट नहीं मिल सकी थी। दोनों दल हाल ही में राज्य सरकार द्वारा स्कूलों में लागू किए गए त्रि-भाषा फॉर्मूला और हिंदी भाषा को कथित रूप से “थोपने” के फैसले के विरोध में भी एकजुट हुए थे। इसी मुद्दे पर जुलाई में दोनों पार्टियों ने संयुक्त ‘विजय रैली’ भी आयोजित की थी।

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