ब्रिटेन की पहली प्रोफेशनल महिला सिख बॉक्सर ने हर चुनौती को किया नॉकआउट

लंदन { गहरी खोज } : इंग्लैंड के हल शहर में एक शांत जिम के दरवाज़े पर 13 साल की एक लड़की अपने छोटे भाई के बॉक्सिंग सेशन के शुरू होने का इंतज़ार कर रही थी।उसके पास न ही ग्लव्स थे और न इसमें शामिल होने का कोई इरादा था।आठ साल के बाद चरण कौर ढेसी अब एक प्रोफ़ेशनल बॉक्सर और चर्चित शख़्सियत हैं। 21 साल की उम्र में प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग में उतरने वालीं वह ब्रिटेन की पहली सिख महिला प्रो बॉक्सर हैं। उन्होंने खेल के क्षेत्र और अपने समुदाय में एक नई राह दिखाई है।
उन्होंने कहा, “मैंने इतिहास रचा है और अभी तो बस शुरुआत की है।” हालांकि, उनकी यह यात्रा आसान नहीं रही है। बॉक्सिंग को एक पुरुष प्रधान खेल माना जाता है।ऐसे में ब्रिटेन में एक दक्षिण एशियाई महिला होने के नाते ढेसी को शक, सांस्कृतिक विरोध और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ा।लेकिन हर मुक्के के साथ उन्होंने उनकी क्षमताओं पर शक करने वाले हर शख़्स को अपना समर्थक बना लिया।वह कहती हैं, “मेरे समुदाय की पहली महिला होने के नाते यह मेरे लिए बहुत दबाव वाला काम था। लेकिन आप क्या कह सकते हैं? हीरा भी तो दबाव में ही निखरता है।”
दो भाइयों के साथ पली-बढ़ीं ढेसी का परिवार खेलों से प्यार करता था। उनके पिता पढ़ाई से ज़्यादा शारीरिक गतिविधियों को महत्व देते थे।वह कहती हैं, “मेरे माता-पिता ने कभी मेरी पढ़ाई पर ज़ोर नहीं दिया, जिसे लोग अजीब समझते हैं। वह हमेशा बॉक्सिंग के लिए प्रेरित करते थे।”
ढेसी कहती हैं, “मेरे दो भाई हैं। मेरे पिता ने हम तीनों को ही खेलों में ध्यान देने को कहा।”लेकिन बॉक्सिंग शुरुआत में उनकी योजना में शामिल नहीं था। ढेसी ने असल में कराटे से ट्रेनिंग शुरू की थी और उन्हें बॉक्सिंग का पता तब चला जब उनके भाई ने एक स्थानीय जिम जॉइन किया।
वह कहती हैं, “मुझे शुरुआत में बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि बॉक्सिंग क्या होती है। यह तो मेरे छोटे भाई की इच्छा थी। मैं उसके साथ जिम गई और बस दरवाज़े पर खड़ी थी, तभी कोच मुझे खेल में शामिल होने के लिए कहने लगे।”
ढेसी ने शुरुआत में उन्हें मना किया, लेकिन बाद में मौक़ा आज़माया और उन्हें कुछ अलग ही महसूस हुआ।वह कहती हैं, “मैंने एक दिन ट्राई किया और सभी कोच कहने लगे कि मैं कितनी अच्छी हूं। उसी दिन से मैंने इसे जारी रखा। फिर मुझे इंग्लैंड टीम के लिए भी चुना गया।”
उस दिन से ढेसी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। यूथ अमेचर खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने तीन राष्ट्रीय, एक यूरोपियन सिल्वर मेडल और तीन इंटरनेशनल क्राउन्स पुरस्कार जीते। लेकिन उनके लिए यह केवल उपलब्धियों तक सीमित नहीं था। ढेसी प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग में उतरकर रूढ़ियों को तोड़ना चाहती थीं।हालांकि, प्रोफ़ेशनल बनने के बाद उन्हें नई चुनौतियों और अपने ही समुदाय की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
वह कहती हैं, “मुझसे पूछा गया, ‘अगर तुम्हें चोट लग गई तो तुमसे कौन शादी करेगा?’ ‘क्या तुम्हें किचन में नहीं रहना चाहिए’। इस तरह की बातें काफ़ी नकारात्मक थीं। यहां तक कि यह सवाल भी किया गया, ‘तुम्हारा प्लान बी क्या है?'” वह कहती हैं, “लेकिन मेरा प्लान ए बॉक्सिंग है और मेरा प्लान बी भी बॉक्सिंग ही है।” मई में ढेसी ने इन सवालों का जवाब अपने मुक्कों से दिया जब अपने पहले ही प्रोफ़ेशनल मुक़ाबले में उन्होंने नॉकआउट से जीत हासिल की। इसके बाद यह क्लिप और उनकी कहानी वायरल हो गई।
वह कहती हैं, “अचानक वही लोग, जो मेरी क्षमता पर शक कर रहे थे, मेरी तारीफ़ करने लगे कि मैंने पंजाबी और सिख समुदाय को गौरवान्वित किया है।”
“ये वही लोग हैं जो तब साथ नहीं होते जब आप मेहनत कर रहे होते हैं। लेकिन अब वही सीधे मेरे पास आ रहे हैं। उन्हें एहसास हो गया है कि मैंने रिंग में शानदार प्रदर्शन किया है और यह मज़ाक नहीं है। बॉक्सिंग ही मेरी ज़िंदगी है।”