ईडी ने करीब 697 करोड़ रुपये से जुड़े घोटाले में अमित अग्रवाल को किया गिरफ्तार

नई दिल्ली { गहरी खोज }: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रविवार को कहा कि उन्होंने देश से 696.69 करोड़ रुपये की अवैध हेराफेरी से जुड़े धन शोधन के एक बड़े मामले में कथित प्रमुख संचालक अमित अग्रवाल को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार के बाद आरोपी को पीएमएलए अदालत के सामने पेश किया गया, जहां उसे सात दिन के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया गया।
यह गिरफ्तारी धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चल रही जांच से जुड़ी है।
ईडी की पीएमएलए जांच दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज एक एफआईआर के आधार पर शुरू हुई है।
एफआईआर में किंजल फ्रेट फॉरवर्डिंग (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड और उसके सहयोगियों पर भारतीय दंड संहिता 1860 के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र समेत गंभीर अपराधों के आरोप लगाए गए हैं। शुरुआती आरोप था कि चार्टर्ड अकाउंटेंट विकास मोहपाल ने अपने प्रमाण-पत्रों का गलत इस्तेमाल कर अहम दस्तावेज फॉर्म 15सीए और 15सीबी की जालसाजी की, जो विदेशी धन प्रेषण को अधिकृत करने के लिए आयकर विभाग द्वारा जरूरी थे।
जांच में सामने आया कि आरोपी संस्थाओं ने माल, सेवाओं और माल ढुलाई शुल्क के आयात के भुगतान के नाम पर धोखाधड़ी कर हांगकांग और सिंगापुर में 696.69 करोड़ रुपये भेजे। हालांकि इनमें से ज़्यादातर लेन-देन में भारत को कभी कोई सामान या सेवा नहीं दी गई। इससे देश को विदेशी मुद्रा का भारी नुकसान हुआ।
संस्थाओं के मालिकों ने इस घोटाले को अंजाम देने के लिए एक जटिल नेटवर्क वाली शेल कंपनियां बनाईं। इन कंपनियों के बैंक खाते खोलने के लिए निदेशक और साझेदारों के सभी पहचान पत्र फर्जी इस्तेमाल किए गए। इस कार्यप्रणाली में नकदी के बदले में इन खातों में फर्जी जमा प्रविष्टियां दर्ज की गईं। इसके बाद, फर्जी एयरवे बिल, चालान तथा महत्वपूर्ण जाली फॉर्म 15सीबी प्रमाणपत्र जैसे जाली दस्तावेजों का उपयोग करके धनराशि को अवैध रूप से भारत के बाहर भेजा गया।
ईडी ने अपनी जांच में अमित अग्रवाल को इस ऑपरेशन के प्रमुख साजिशकर्ताओं में से एक बताया। उन पर फर्जी संस्थाओं का जाल बिछाने, जाली पहचान पत्रों का उपयोग करके बैंक खाते खोलने और नकद-आधारित जमा प्रविष्टियों की व्यवस्था करने में अहम भूमिका निभाने का आरोप है, जिससे बड़े पैमाने पर धन विदेश भेजा जा सका।