रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता विकल्प नहीं बल्कि अस्तित्व और प्रगति के लिए जरूरी: राजनाथ

नयी दिल्ली { गहरी खोज }: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आतंकवाद, महामारी और क्षेत्रीय संघर्षों के इस दौर में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल एक विकल्प नहीं बल्कि अस्तित्व , सुरक्षा, संप्रभुता और प्रगति का रोडमैप है।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत न केवल अपनी ज़रूरतें पूरी करेगा बल्कि दुनिया का एक विश्वसनीय साझेदार भी बनेगा। यह विज़न भारत को 21वीं सदी में एक निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।
श्री सिंह ने शुक्रवार को यहां एक कार्यक्रम में कहा कि आत्मनिभर्रता संरक्षणवाद का नहीं बल्कि संप्रभुता और राष्ट्रीय स्वायत्तता से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि संघर्ष, व्यापार युद्ध और अस्थिरता के कारण दुनिया भर में स्थिति निरंतर बदल रही हैं और भू-राजनीतिक बदलावों ने साबित कर दिया है कि रक्षा के लिए दूसरों पर निर्भरता अब कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का हमेशा से मानना रहा है कि आत्मनिर्भर भारत ही अपनी सामरिक स्वायत्तता की रक्षा कर सकता है।
रक्षा मंत्री ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि कई विकसित देश संरक्षणवादी उपायों का सहारा ले रहे हैं जिससे ‘व्यापार युद्ध’ और ‘टैरिफ युद्ध’ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को अलग तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि यह संरक्षणवाद नहीं है। यह संप्रभुता का मामला है। उन्होंने कहा,“ जब युवा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और संभावनाओं से भरपूर एक राष्ट्र आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता है तो विश्व रुककर उस पर ध्यान देता है। यही वह ताकत है जो भारत को वैश्विक दबावों का सामना करने तथा और भी अधिक मज़बूती से उभरने में सक्षम बनाती है।”
श्री सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा कि दूरदर्शिता, लंबी तैयारी और समन्वय के बिना कोई भी मिशन सफल नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, “ ऑपरेशन सिंदूर भले ही कुछ दिनों के युद्ध, भारत की जीत और पाकिस्तान की हार की कहानी लगे, लेकिन इसके पीछे वर्षों की रणनीतिक तैयारी और रक्षा तैयारियों की एक लंबी भूमिका रही है।” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत की सेनाओं ने वर्षों की कड़ी मेहनत और स्वदेशी उपकरणों पर निर्भरता के ज़रिए इस ऑपरेशन को प्रभावी और निर्णायक रूप से अंजाम दिया।
रक्षा मंत्री ने सुदर्शन चक्र मिशन को भारत की भविष्य की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बताया और कहा कि डीआरडीओ ने हाल ही में स्वदेशी एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली का सफलतापूर्वक परीक्षण किया जिसने एक साथ तीन लक्ष्यों को भेदा। उन्होंने कहा कि यह इस मिशन को साकार करने की दिशा में पहला कदम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इसके पूरी तरह अमल में समय लगेगा लेकिन रक्षा मंत्रालय इस दिशा में पहले ही निर्णायक रूप से आगे बढ़ चुका है।
श्री सिंह ने कहा कि सरकार ने शक्तिशाली स्वदेशी एयरो-इंजन के विकास और निर्माण की चुनौती स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण परियोजना की तैयारियाँ अब लगभग पूरी हो चुकी हैं और जल्द ही जमीनी स्तर पर काम दिखाई देगा। इसके महत्व पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि पहले सवाल यह था कि क्या भारत इतनी उन्नत प्रणालियाँ बना सकता है लेकिन आज सवाल यह है कि इन्हें कितनी जल्दी तैनात किया जा सकता है।
अमेरिकी टैरिफ के कारण दुनिया भर में बनी तनाव की स्थिति का परोक्ष रूप से उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने दोहराया कि भारत किसी को दुश्मन नहीं मानता लेकिन अपने हितों से समझौता भी नहीं करेगा। उन्होंने कहा,“ हम किसी भी देश को अपना दुश्मन नहीं मानते। लेकिन हमारे लोगों, किसानों, छोटे व्यवसायों और आम नागरिकों का कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। दुनिया जितना दबाव डालेगी, भारत उतना ही मज़बूत होकर उभरेगा।”
रक्षा मंत्री ने इस सदी के घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया ने आतंकवाद और कोविड-19 महामारी से लेकर यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अफ्रीका में संघर्षों जैसी कई विघटनकारी चुनौतियों का सामना किया है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और अंतरिक्ष विज्ञान जैसी प्रौद्योगिकी जीवन और सुरक्षा को नए सिरे से परिभाषित कर रही हैं। उन्होंने कहा,“ यह सदी शायद सबसे अस्थिर और चुनौतीपूर्ण है। ऐसे विश्व में भारत का एकमात्र स्थायी मार्ग आत्मनिर्भरता है।”
श्री सिंह ने रक्षा संबंधी मामलों की रिपोर्टिंग में मीडिया से युद्ध के समय संवेदनशीलता का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “ एक छोटी सी रिपोर्ट लाखों लोगों का मनोबल बढ़ा सकती है लेकिन एक गलती जान ले सकती है। संघर्ष में, स्वतंत्रता और जिम्मेदारी साथ-साथ चलनी चाहिए। मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रहरी भी है।”
भारत का आत्मनिभर्रता का दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह केवल नारा नहीं बल्कि भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और प्रगति का रोड़मैप है। उन्होंने कहा , “ रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत एक नारा नहीं बल्कि भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और प्रगति का रोडमैप है। आने वाले वर्षों में भारत न केवल अपनी ज़रूरतें पूरी करेगा बल्कि दुनिया का एक विश्वसनीय साझेदार भी बनेगा। यह विज़न भारत को 21वीं सदी में एक निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित करेगा। ”
इस अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह भी उपस्थित थे।