रावण का भांजा कौन था? किस देवता के वरदान से बन गया था शक्तिशाली राक्षस

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धर्म { गहरी खोज } : जब भी हम राक्षसों की बात करते हैं तो त्रेतायुग सबसे पहले जहन में आता है। यही वो युग था जब एक से बढ़कर एक खतरनाक राक्षस हुए। आज हम एक ऐसे राक्षस की बात करेंगे जो भक्त तो भोलेनाथ का था, लेकिन लंकापति रावण का भांजा था। वैसे राक्षस तो लगभग सभी देवों के देव महादेव के भक्त और रावण के खानदान से संबंध होता था। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, रावण का भांजा भयंकर खतरनाक और आततायी राक्षस था। उसने महादेव को अपनी तपस्या से खुश करके वरदान में उनके अमोघ त्रिशूल को हासिल किया था। यही वो त्रिशूल था, जिसके दम पर उसने भगवान श्रीराम के पूर्वज से राज्य हथिया लिया था। अब सवाल है कि आखिर रावण का भांजा कौन था? कितना खतरनाक राक्षण था रावण का भांजा? महादेव के कैसे मिला अमोघ त्रिशूल? आइए जानते हैं इस बारे में-
रावण का खतरनाक भांजा लवणासुर था। वह त्रेतायुग में भयंकर खतरनाक और आततायी राक्षस था। इस क्रूर राक्षस का सीधा संबंध रावण से था। वाल्मीकि कृत रामायण के उत्तर कांड में लवणासुर की कथा वर्णित है। कथा के अनुसार, भयंकर असुर लवणासुर के पिता का नाम मधु था, जबकि उसकी माता राक्षसी वंश की कुम्भिनी थी। कुम्भिनी रावण की सौतेली बहन थी। इस तरह से लवणासुर रावण का भांजा हुआ।
लवणासुर मथुरा से लगभग साढ़े तीन मील दक्षिण-पश्चिम की ओर स्थित मधुपुरी का राजा था, जिसे मधुवन ग्राम भी कहते हैं। आज भी यहां लवणासुर की गुफा है। लवणासुर अपने मामा रावण की तरह महादेव का भक्त था और उसने तप कर अमोघ त्रिशूल हासिल किया था। उस त्रिशूल के बल पर उसने भगवान श्रीराम के पूर्वज मांधाता यौवनाश्व चक्रवर्ती सूर्यवंशी सम्राट से राज्य छीन लिया था।
लवणासुर अपने मामा की ही तरह रूद्र की राक्षसी उपासना में पशुओं, मनुष्यों और ब्राह्मणों की नर बलि दिया करता था। वैदिक यज्ञ करने वाले ऋषियों के लिए तो वह काल था। त्रस्त देवताओं की प्रार्थना पर श्रीराम ने अपने छोटे भाई शत्रुघ्न को लवणासुर का वध करने का आदेश दिया। शत्रुघ्न युद्ध के लिए जाते समय महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में भी रुके थे।
शत्रुघ्न ने कई दिनों तक चले भयंकर युद्ध में रावण के भांजे लवणासुर को न केवल बुरी तरह हराया, बल्कि उसका वध भी किया। वध करने के बाद उन्होंने भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा को नए सिरे से बसाया। महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में लोणार सरोवर, जो पहले लवणासुर सरोवर था, विश्व प्रसिद्ध है। माना जाता है कि शत्रुघ्न ने यहीं पर लवणासुर का वध किया था तभी इसका नाम लवणासुर सरोवर पड़ा।

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