सरकार उद्योग जगत को एकतरफा कार्रवाइयों से बचाने के लिए प्रतिबद्ध: पीयूष गोयल

नयी दिल्ली{ गहरी खोज }: भारत के खिलाफ व्यापारिक प्रतिबंध लगाने के अमेरिका के निर्णयों के बीच वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि इस तरह की एकतरफा कार्रवाइयों से देश के उद्योग जगत के बचाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि भारत का निर्यात चालू वित्त वर्ष में पिछले वर्ष से अधिक रहेगा।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने यहां उद्योग सम्मेलन ‘भारत बिल्डकॉन 2026’ का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारतीय उद्यमियों से विश्वस्तरीय माल तैयार करने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए विनिर्माण में प्रधानमंत्री के ‘शून्य दोष, शून्य प्रभाव’ और ‘दाम-कम, दम ज़्यादा’ के आह्वान पर प्रकाश डाला। उन्होंने उद्योग जगत से भारत की ओर से कई विकसित देशों के साथ हाल में किये गये मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का लाभ उठाने को कहा।
श्री गोयल ने कहा कि ये समझौते और इस तरह से समझौतों के लिए कई देशों और समूहों के साथ बातचीत में तेज़ी, उभरते भारत के साथ व्यापार करने की उनकी इच्छा का परिणाम है।
सम्मेलन में देश भर से एकत्र उद्यमियों को संबोधित करते हुए, श्री गोयल ने कहा, “ सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि उद्योग जगत को कुछ देशों की एकतरफा कार्रवाइयों से उत्पन्न अनावश्यक तनाव या कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।”
सरकार को ऐसे क्षेत्रों की जानकारी दी जाये, जिन्हें वैकल्पिक बाज़ारों की आवश्यकता है। उन्हाेंने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय नये अवसर खोलने के लिए दुनिया भर के भागीदारों से संपर्क कर रहा है।
उन्होंने कहा कि घरेलू खपत को बढ़ावा देना भी सरकार की एक प्राथमिकता रही है। वस्तु एवं सेवा कर
( जीएसटी) परिषद की आगामी बैठक में ऐसे उपाय किए जाने की उम्मीद है, जो मांग को तेज़ी से बढ़ायेंगे और घरेलू विनिर्माण को मज़बूत बढ़ावा देंगे। उन्होंने इकाइयों से गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों में सक्रिय भागीदारी करने को कहा ताकि भारत उच्च-गुणवत्ता वाले उत्पादों का एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता बनकर उभरे।
भारत की वैश्विक स्थिति में लगातार मजबूती को रेखांकित करते हुए, श्री गोयल ने विश्वास के साथ कहा कि इस वर्ष का निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में अधिक होगा, जो भारतीय उद्योग की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता और जुझारुपन को दर्शाता है।‘
‘शून्य दो, शून्य प्रभाव’ के जरिये गुणवत्तापूर्ण एवं स्वच्छ विनिर्माण ‘दाम-कम, दम ज़्यादा’ – यानी किफ़ायती और मजबत माल बनाने की जरूरत पर बल देते हुए श्री गोयल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बुनियादी ढांचा विस्तार राष्ट्रीय विकास की केंद्रीय प्राथमिकताओं में बना हुआ है।
श्री गोयल ने ज़ोर देकर कहा कि कुछ विशेषज्ञ और मीडिया भारत की क्षमता को सही ढंग से नहीं समझ पा रहे हैं। भारत ने कोविड-19 और यहां तक कि परमाणु प्रतिबंधों जैसी चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है और आज वह मज़बूती से खड़ा है, वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए तैयार है।
वाणिज्य मंत्री ने ऑस्ट्रेलिया में आवास की भारी कमी की ओर भी ध्यान आकर्षित किया, जहां लगभग 10 लाख घरों की आवश्यकता है। उन्होंने भारतीय व्यवसायों, श्रमिकों और विशेषज्ञों को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया और कहा कि ऑस्ट्रेलिया भारत से वित्तीय सहयोग, तकनीकी विशेषज्ञता और कार्यबल समर्थन के लिए तैयार है। भारतीय पेशेवरों को ऑस्ट्रेलियाई मानकों को पूरा करने के लिए प्रशिक्षण और प्रमाणन के अवसर भी प्रदान किये जा रहे हैं।
श्री गोयल ने ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टीन, आइसलैंड और यूनाइटेड किंगडम सहित विकसित देशों के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के बढ़ते नेटवर्क पर भी प्रकाश डाला, जिसके लिए यूरोपीय संघ और अन्य देशों के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि ये समझौते भारतीय उद्योगों जैसे निर्माण, इस्पात और संबद्ध क्षेत्रों के लिए वैश्विक अवसरों के द्वार खोलेंगे।